उत्तर प्रदेश राज्य के बहराइच जिला से शालिनी पांडेय मोबाइल वाणी के माध्यम से रिंकी जी से बातचीत की। बातचीत में उन्होंने बताया की महिलायें अपने जीवन को बेहतर बना सकती है। जैसे कि पति के नाम पर दस बीघा जमीन और महिला के नाम पर पांच बीघा जमीन तो वो उसमे खेती या कोई भी व्यवसाय कर सकती है और बेहतर बन सकती है, और अपने बच्चो को पढ़ा सकती है। गांवों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी भी कम है और इस तरह उनके पास कोई आर्थिक अवसर नहीं हैं। ऐसे कई पुरुष हैं जो सोचते हैं कि महिलाएं दूर नहीं जा सकती हैं, लेकिन अब एक कमाने और दस खाने का जमाना नहीं है। पुरुष वर्ग यह सोचता है की कुछ महिलायें इस अधिकार का गलत इस्तेमाल कर सकती है। लेकिन सारी महिलायें एक जैसी नहीं होती इस लिए समाज को अपनी सोच बदलने की जरुरत है
सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में...
उत्तर प्रदेश राज्य के बहराइच जिला से साक्षी कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से पचन नाथ से बातचीत की। बातचीत में उन्होंने ने बताया की महिलाओं को खेती और किसी के अलावा उन्हें सभी प्रकार के रोजगार और योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए जिससे वे कोई काम करके अपने जीवन में आगे बढ़ सके और अपने जीवन को बेहतर बना सके। महिलाये शिक्षित हो जाएँगी तो समाज में आगे बढ़ेंगी जिससे वो अपने परिवार का लालन पालन करेंगी।महिलायें समूह बनाते हैं और एक संगठन बनाते हैं और एक संगठन बनाने के बाद, उन्हें धीरे-धीरे ब्याज पर बहुत पैसा मिलेगा ताकि वे अपना कोई भी कारखाना चला सकें। और जब वे कुटीर उद्योग चलाते हैं, तो वे अपने पैरों पर खड़े हो सकते हैं और उनकी आजीविका आसानी से चल सकती है क्योंकि सरकार भी संविधान के अनुसार महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए तैयार है और आगे बढ़ रही है। उतना विकास नहीं हुआ है जितना होना चाहिए था और पुरुषों के बाद महिलाओं को भी अपने अधिकार मिल रहे हैं ताकि जब उनके भीतर थोड़ी जागरूकता हो, तो धीरे-धीरे समूह और किसी के द्वारा इसे और विकसित किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश राज्य के बहराइच जिला से शालिनी पांडेय मोबाइल वाणी के माध्यम से ओम प्रकाश प्रजापति से बातचीत की। बातचीत में उन्होंने ने बताया की महिलाये अब पिछड़ी नहीं है महिलाएं हर विभाग में तेजी से भाग ले रही हैं, चाहे वह शिक्षा विभाग हो, स्वास्थ्य विभाग हो, रेलवे विभाग हो, न्याय विभाग हो, हर जगह महिलाएँ बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रही है। यह सिर्फ इतना है कि ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं को उतनी शिक्षा नहीं दी जा रही है, इसलिए ग्रामीण क्षेत्र में, अपनी महिलाओं को शिक्षित करने का प्रयास करना आवश्यक है। स्वतंत्र निर्णय कोई भी व्यक्ति ले सकता है, स्वतंत्र निर्णय कोई भी महिला ले सकती है, किसी पर कोई दबाव नहीं है। महिलाओं को उतना ही अधिकार देना चाहिए जितने में उनका आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके। महिलाओं के भूमि अधिकारों के मार्ग में ऐसी कोई बाधा नहीं है। ऐसे कई लोग हैं जिन्हें अब महिलाओं को जमीन दी जा रही है क्योंकि अगर किसी पुरुष के नाम पर जमीन दी जाती है तो उसका वजीफा अधिक होता है और महिलाओं के नाम जाती है तो स्टांप कम लगता है तो भूमि अधिकार तो उनको मिलता ही चला जा रहा है। महिलाओं को शिक्षित किया जाये और उनके बच्चो को शिक्षित किया जाये
उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला के पयागपुर प्रखंड से शिव कुमार तिवारी मोबाइल वाणी के माध्यम से हमारे श्रोता सुजीत सिंह से बात की, उन्होंने बताया की जैसे कि हाल की पीढ़ी के महिलायें स्वतंत्र रूप से अपने निर्णय लेने में सक्षम हैं, लेकिन जो बुजुर्गों की तरह पिछड़ी हुई महिलाएं हैं जो शिक्षित नहीं हैं, वे लोग अपने निर्णय खुद नहीं ले पाते हैं। शिक्षित महिलाओं को ही भूमि का अधिकार मिलना चाहिए नहीं तो विवाद की स्थिति बन सकती है।महिलाओं को भूमि अधिकार प्राप्त करने में बाधाएं हो सकती हैं जैसे सबसे पहले पारिवारिक समस्याएं आएंगी, पारिवारिक समस्याएं जैसे तलाक, आदि, जो भी हो, ऐसा होने की संभावना है, बेहतर होगा कि इस पर ध्यान न दिया जाए
उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला के पयागपुर प्रखंड से शिव कुमार तिवारी मोबाइल वाणी के माध्यम से हमारे श्रोता भूपेंद्र मौर्य से बात की, उन्होंने बताया की भारत एक पुरुष प्रधान देश है और यहाँ महिलाएं पिछड़ी हुई हैं। महिलाओं को भूमि अधिकार देकर उनके जीवन में उनकी सामाजिक , आर्थिक स्थिति में शैक्षिक और राजनीतिक सुधार होंगे और इससे समाज में समानता बढ़ेगी।
उत्तर प्रदेश राज्य के बहराइच जिला से साक्षी कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से किरण जी से बातचीत की। बातचीत में उन्होंने ने बताया की बाहर के काम जैसे खेत किसानी के सभी को बराबर का हक़ मिलना चाहिए और महिलायें जब भी बाहर निकले तो उन्हें हर तरह की सुविधाएं मिलनी चाहिए महिलाओं को खेती किसानी के बजाय अन्य योजनाओं का लाभ भी मिलना चाहिए जिससे वह अपने जीवन में आगे बढ़ सके और अपने जीवन को बेहतर बना सके।
कारीगर लोगों के लिए आर्यावर्त विश्वकर्मा योजना के तहत 3 लाख का ऋण उचित दर पर दिया जा रहा है
उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से शालिनी पांडेय ने मोबाइल वाणी के माध्यम से गंगापुर की स्थानीय निवासी यशी पांडेय से बातचीत की। यशी पांडेय ने बताया कि महिलाओं को भूमि का अधिकार मिलना चाहिए ,इससे वो आगे पढाई व व्यापार कर सकती है।
उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से शालिनी पांडेय ने मोबाइल वाणी के माध्यम से स्थानीय निवासी पूजा से बातचीत की। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को शिक्षित करना बहुत जरुरी हैं। यदि महिलाओं को भूमि अधिकार मिलेगा तो वे अपने हक़ के लिए आवाज़ उठा सकती हैं ,खुद सक्षम हो सकती हैं ,बच्चों का लालन पालन कर सकती हैं। शादी हो जाने के कारण महिलाओं को अधिकार नहीं दिया जाता है
