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उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से विशाल सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से मगरे गांव कोलवा के स्थानीय निवासी रामकुमार से बातचीत की उन्होंने बताया की उनके क्षेत्र में पानी का सप्लाई नहीं हो रहा है ,लोगों को मनरेगा के तहत काम नहीं मिल रहा है।

उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से विशाल सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से नारायण गांवके स्थानीय निवासी अरुण कुमार से बातचीत की उन्होंने बताया की उनके क्षेत्र में पानी का सप्लाई नहीं हो रहा है ,लोगों को मनरेगा के तहत काम नहीं मिल रहा है। गौशाला व सड़क का निर्माण कार्य भी सही से नहीं हो रहा है

उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से विशाल सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से गांव के स्थानीय निवासी जयजय राम से बातचीत की उन्होंने बताया की उनके क्षेत्र में पानी का सप्लाई नहीं हो रहा है

उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से विशाल सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से मौज बनिया गांव के स्थानीय निवासी इकबाल हुसैन से बातचीत की। इकबाल हुसैन के पिता का नाम रशीद है। उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र में तालाबों तथा मनरेगा में कार्य नहीं कराया जा रहा है। साथ ही यहाँ पानी की टंकी की व्यवस्था भी नहीं है

उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से विशाल सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से गांव कड़ा कुट्टी के स्थानीय निवासी संजय से बातचीत की। दुखीराम के पिता का नाम सुन्दर है। उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र में तालाबों तथा मनरेगा में कार्य नहीं कराया जा रहा है

उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से विशाल सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से गोसाई पुरवा गांव के स्थानीय निवासी दुखीराम से बातचीत की। दुखीराम के पिता का नाम रामकुमार है। उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र में तालाबों तथा मनरेगा में कार्य नहीं कराया जा रहा है

उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से विशाल सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से स्थानीय निवासी रामराज से बातचीत की। उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र में ना तालाबों में कार्य कराया जा रहा है और ना ही पानी की टंकी की व्यवस्था कराई जा रही है

उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से विशाल सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि उनके क्षेत्र में मनरेगा के तहत काम नहीं मिल रहा है और ना है तालाबों में कार्य कराया जा रहा है

उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से साक्षी तिवारी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं को नहीं मिल रहा उनका अधिकार।आदिवासी समूहों की महिलाओं को वर्षों से वोट बैंक के रूप में देखा जाता रहा है। जनजातीय समूहों की महिलाओं को स्वतंत्रता के बाद से राजनीतिक दलों द्वारा राजनीतिक भागीदारी से जोड़ा गया है। वे बुनियादी मुद्दों के बारे में जल्दी और अनजान रहे हैं, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि वे अपने मुद्दों को राजनीतिक दलों के साथ उठाएं और अपना घोषणापत्र तैयार करें। शिक्षा कल्याण योजना, नागरिक दस्तावेजों तक पहुँच के लिए समुदाय के लिए अलग बजट और जाति आधारित जनगणना घोषणापत्र से समुदाय की कुछ प्रमुख मांगें हैं। अधिकांश महिलाएं अब मुख्यमंत्री के रूप में अपना जीवन यापन करती हैं और उनके पास आधार कार्ड, सार्वजनिक प्रमाण पत्र, पैन कार्ड और चुनाव कार्ड होने के कारण मतदाताओं के रूप में पंजीकरण करना मुश्किल हो जाता है।