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उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से शालिनी पांडेय ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि गर्मियों के मौसम में गर्म हवाओं और तेज धूप के कारण विभिन्न बीमारियों का खतरा रहता है। निर्जलीकरण या लू लगने और उल्टी की समस्या आमतौर पर देखी जाती है, इसलिए गर्मियों के दिनों में हमें अपने आहार का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता होती है। प्रशीतित भोजन खाने से बचें क्योंकि इससे खाद्य विषाक्तता हो सकती है।

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उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से शालिनी पांडेय ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि लैंगिक समानता की दिशा में कितना काम किया गया है। यह कहा जा सकता है कि इस लक्ष्य को 2030 तक प्राप्त करना मुश्किल है, हालांकि अब तक लगभग इकतालीस देशों ने लैंगिक समानता का कम से कम एक लक्ष्य हासिल किया है, लेकिन अगर आप पूरी स्थिति को देखें तो स्थिति चिंताजनक है।

उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से शालिनी पांडेय ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि लैंगिक असमता के कुछ जिम्मेदार कारक भी है ,जैसे कि प्राचीन काल से ही पुत्र को प्राथमिकता दी जाती है

उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से शालिनी पांडेय ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी महिलाओं और पुरुषों के समान दर्जा नहीं दिया जाता है।हमारा समाज जिसमें पुरुषों और महिलाओं का समान योगदान हो, फिर भी देश के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के प्रति संकीर्ण सोच न केवल आधी आबादी बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास में बाधा डाल रही है।

उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से शालिनी पांडेय ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि अंतर्राष्ट्रीय मानकों की तुलना में हमारी साक्षरता दर 74 प्रतिशत है।अभी भी दस प्रतिशत पीछे हैं जहां पुरुष साक्षरता 82 प्रतिशत और महिला साक्षरता 65 प्रतिशत है। अब आप खुद अनुमान लगा सकते हैं कि भारत में महिला शिक्षा की स्थिति क्या है।

उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से शालिनी पांडेय ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि सावित्री बाई फुले नारीवादियों में से एक मानी जाने वाली, वह और उनके पति ज्योतिराव फुले का मानना था कि शिक्षा ही एकमात्र साधन है जिसके द्वारा महिलाएं सदियों के अन्याय से मुक्त हो सकती हैं। पुणे के भिडेवाड़ा नामक स्थान पर लड़कियों के लिए पहला स्कूल बनाने के उनके प्रयासों ने महिलाओं की आवाज उस समय उठाई जब महिलाओं का अस्तित्व लगभग नकार दिया गया था।

उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से शालिनी पांडेय ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि घूंघट का अभ्यास केवल चेहरे को ढंकने का काम नहीं करता है, बल्कि यह समाज में उत्पीड़न के खिलाफ उनकी आवाज़ और अधिकारों को कुचलता है। इस वजह से महिलाएं खुलकर बोल नहीं पाती हैं। सवाल यह है कि क्या इन महिलाओं को अपनी इच्छानुसार पहनने और कपड़े पहनने की स्वतंत्रता नहीं है