हुजूरपुर (बहराइच)। अयोध्या में श्रीराम मंदिर प्राण पतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर हर किसी में उत्साह है। जानकार बताते है कि वर्ष 1989 में राम मंदिर आंदोलन के समय यहां के तमाम लोग रामनाम अंकित ईंट लेकर घर-घर पहुंच राम मंदिर निर्माण की अलख जगाने का काम कर रहे थे। दर्जनों लोगों को गिरफ्तार कर उत्तराखंड के सितारगंज जेल में भी कैद किया गया था। वर्ष 1989 में जब मंदिर निर्माण का आंदोलन जोर पकड़ रहा था उस समय लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा निकल चुकी थी।उसी समय हुजूरपुर क्षेत्र में भी लोग रामनाम अंकित ईंट लेकर घर-घर जाकर मंदिर निर्माण की अलख जगाने का काम कर रहे थे। इन कार सेवकों का नारा था कि कसम राम की खाते हैं, मंदिर वहीं बनायेंगे। इनमें जो कार सेवक शामिल थे उनमें अब दिवंगत हो चुके पंडित लक्ष्मीनारायण शुक्ला, राजबख्श सिंह, सियाराम यादव, संतराम दुबे, विश्वदेव पाठक, रामफेरन शुक्ला, अमर सिंह,शीतला सिंह आादि शामिल थे। यह सभी लोग ग्रामीण अंचल मे अलख जगाने के बाद हजारों की संख्या में लोगों को लेक अयोध्या कारसेवा के लिए निकल चुके थे। इनमें कइयों को गिरफ्तार कर लिया गया और उत्तराखंड की सितारगंज जेल भेज दिया गया। यह वो सूरमा थे जो सरकारों से अपनी लड़ाई लड़ते रहे इस आश मे कि एक न एक दिन अयोध्या में भव्य श्री राम मंदिर जरूर बनेगा। राम मंदिर निर्माण की आश लिए यह पूण्य आत्माएं तो स्वर्ग सिधार गईं पर आज उनकी आत्माएं स्वर्ग में भव्य अयोध्या, सुंदर अयोध्या व उसमें बन रहे राम मंदिर को देखकर जरूर खुश हो रही होंगी की उन्होंने जो सपना देखा था वह आज साकार हो रहा है।
