लोस चुनाव केलिए बनाई 100 दिन की योजना
मुख्यमंत्री जानकल्याण योजना का पहुंचाया लाभ
जनकल्याणकारी योजनाओं का लिया लेखा जोखा
सेवा भारती संस्था को सौंपा 25 हजार का चेक
अब बोली कुछ नहीं देता मेरा नाम यासीन खान है , यहाँ नरसिंहपुर नगरपालिका क्षेत्र में , कभी - कभी कचरे के वाहन हमारे वार्ड में नहीं आते हैं ।
नेशनल लोक अदालत में 1227 प्रकरणों का हुआ निराकरण। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
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नमस्कार साथियों में निकेत अवधिया नरसिंहपुर से आप सभी का स्वागत करता हूं। दोस्तो हम सभी को अपनी जिंदगी में हम को अपना कर अहम को भूलकर चलना चाहिए अक्सर यह होता है कि दोस्तों जब हमारे बीच कोई छोटा व्यक्ति आ जाता है चाहे वह बल से हो चाहे पैसे से हो चाहे समाज में इज्जत से अगर वह छोटा है तो हमारे अंदर एक अहम अपने आप आ जाता है इस कहानी में मैनें यह बताने की कोशिश की है हमें हम पर ही रहना चाहिये हम शव्द हमे लोगो से हर एक से जोड़ कर रखता है।अगर आपको मेरी कहानी बहुत अच्छी लगी आप सभी आपनी राय जरुर साझा किजीये।
प्रगतिशील विचारधारा रखने वाले लोग दुख को जीवन का संघर्ष मान कर उस से दो-दो हाथ करने की तैयारी रखते है, लेकिन धर्म व इश्वर की परिकल्पना के साथ जीने वाले लोग दुख का संबंध अपने भाग्य से जोड़ते है या फिर सारा दोष दूसरे पर या इश्वर पर मढ़ देत है। मैने अपने व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन में यही अनुभव किया है। आज हम बात करेंगे विचारों पर अनुशासन रख कर कैसे दुखों पर विजय पाकर आनंदमय रह सकते है । अकसर हम तब अपनी आसपास की परिस्थितियों का विश्लेषण करने लगते है जब हमारा सोचा हुआ काम पुरा नहीं होता है। हम असफल हो जाते है तो निश्चित ही उस समय हम बेहद दुखी होते है। और इस दुख का कारण भीतर की बजाए बहार ढूंढने लगते है। मैने कई बार देखा है धर्मभीरू लोग इस दुख के लिए ईश्वर को दोष देने लगते है।
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