Transcript Unavailable.

जेंडर हिंसा के खिलाफ चल रहे हमारे इस कार्यक्रम बदलाव का आगाज़ में आज सुनिए यशस्विनी जी को, जो जेंडर आधारित हिंसा पर कानूनी मामलों की जानकार हैं। यशस्विनी जी का कहना है कि अगर हिंसा है तो उसे करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का कड़ा प्रावधान भी है. बस जरूरत है तो... कदम बढ़ाने की!

Transcript Unavailable.

“यह देश संविधान से चलता है’, यह एक लाइन जो हम हर दूसरे दिन किसी न किसी के मुंह से सुनते ही रहते हैं। सविंधान पर इतनी आस्था के बाद भी देश में संविधानिक मूल्यों की भावनाओं का अभाव है। संविधान के प्रति पैदा हुए इस "अभाव" के भाव के लिए वही लोग जिम्मेदार हैं, जो हर एक बात पर कहते हैं कि यह देश संविधान से चलता है।

Transcript Unavailable.

Transcript Unavailable.

हंसने-हंसाने से इंसान खुश रहता है, जिससे मानसिक तनाव, चिंता और डिप्रेशन कम होता है। दोस्तों, उत्तम स्वास्थ्य के लिए हंसी-मज़ाक बहुत ज़रूरी है। इसीलिए मोबाइल वाणी आपके लिए लेकर आया है कुछ मजेदार चुटकुले, जिन्हें सुनकर आप अपनी हंसी रोक नहीं पाएंगे। हो जाइए तैयार, हंसने-हंसाने के लिए सुनिए हंसी-मज़ाक में डूबे हंसगुल्ले और रिकॉर्ड कीजिए अपने चुटकुले मोबाइल वाणी पर, फोन में नंबर 3 का बटन दबाकर।

भारतीय मानसिकता का अध्ययन बताता है कि ईश्वर व धर्म के प्रति हमारी श्रद्धा व आस्था की जडे़ काफी गहराई तक स्थापित हो चुकी है। शिक्षा के प्रसार व इस के बाद वैज्ञानिक दृष्टिकोण स्थापित करने के लिए विवेकवादी, तर्कशील, रेषनालिस्ट जैसे संगठनों द्वारा समाज में अंधविश्वास उन्मूलन के लिए किए जाने वाले जनजागरण अभियान के दौरान यह आरोप भी उठते है कि यह लोग हमारे इश्वर व धर्म का विरोध करते है। अंधविश्वास उन्मूलन यानी श्रद्धा व आस्था का विरोध माना जाता है। इश्वर व धर्म के प्रति यही श्रद्धा व आस्था अंधविश्वास उन्मूलन के अभियान को प्रभावित भी करने लगता है। समाज में अंधविश्वास उन्मूलन के साथ ईश्वर व धर्म की कथित रूप से गढ़ी गई परिभाषा से बहार निकलना कठीन हो जाता है। आज हम बात करेंगे क्या ईश्वर व धर्म अंधविश्वास का मूल कारण है?

Transcript Unavailable.

मेरा गांव मेरी पहचान कार्यक्रम के तहत आज हमसे खास बातचीत करने व अपनी राय देने के लिए जुड़े ग्राम खूटाम्बा के निवासी सौरभ यादव जी।