बिहार राज्य के नवादा ज़िला के नारदीगंज प्रखंड से सुनैना देवी ,मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि बच्चों को खुद से निर्णय लेना कैसे सिखाएं?
बिहार राज्य के नवादा ज़िला के नारदीगंज प्रखंड से हरियाली कुमारी ,मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि क्या संस्कार मानसिक विकास को प्रभावित करता है ?
बिहार राज्य के नवादा ज़िला के नारदीगंज प्रखंड से हरियाली कुमारी ,मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि बच्चा दूसरों की नकल क्यों करता है ?
बिहार राज्य के नवादा ज़िला के नारदीगंज प्रखंड से सुनीता कुमारी ,मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि क्या महिलाओं के मानसिक विकास के लिए परामर्श लेना चाहिए ?
बिहार राज्य के नवादा ज़िला के नारदीगंज प्रखंड से सुनीता कुमारी ,मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि बच्चा नए लोगों से डरता है तो क्या करें ?
बिहार राज्य के नवादा ज़िला के नारदीगंज प्रखंड से हमारी श्रोता ,मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि क्या बच्चों को माफ़ करना सिखाना चाहिए ?
बिहार राज्य के नवादा ज़िला के नारदीगंज प्रखंड से शालू कुमारी,मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि क्या आदतें ध्यान से ही बनती है ?
बिहार राज्य के नवादा ज़िला के नारदीगंज प्रखंड से हमारे श्रोता ,मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि बच्चों को टीवी या मोबाइल देना मानसिक स्वास्थ्य पर कैसा असर डालता है ?
बिहार राज्य के नवादा ज़िला के नारदीगंज प्रखंड से मुन्नी परवीन ,मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि बच्चे सवाल पूछना क्यों पसंद करते है ?
बिहार राज्य के नवादा ज़िला के नारदीगंज प्रखंड से कमली देवी,मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि बच्चों के विश्वास कैसे बढ़ते हैं?

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बच्चों को अपने निर्णय स्वयं लेने की आदत सिखाना उन्हें आत्मविश्वासी, जिम्मेदार और विचारशील व्यक्ति बनने में मदद करता है। इसे सिखाने की शुरुआत बचपन से ही की जा सकती है जैसे ,उन्हें यह चुनने देना कि वे कौन से कपड़े पहनना चाहते हैं या कौन सा नाश्ता खाना पसंद करेंगे। जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, माता-पिता उन्हें निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं उनके साथ विकल्पों पर चर्चा करके, हर विकल्प के फायदे-नुकसान समझाकर, और उन्हें अपने निर्णयों के परिणामों का अनुभव करने देकर। बच्चों को यह भी सिखाना जरूरी है कि किसी समस्या का सामना कैसे करना है, किन बातों पर विचार करना है, और अपनी ज़रूरतों के आधार पर क्या प्राथमिकता देनी है। माता-पिता जब अपने निर्णय लेने की प्रक्रिया बच्चों के सामने रखते हैं, तो बच्चे आलोचनात्मक रूप से सोचने और परिणामों को समझने की कला सीखते हैं। अगर वे गलतियाँ करते हैं, तो उन्हें सीखने का अवसर देना चाहिए, बजाय तुरंत हस्तक्षेप करने के। बच्चों को यह भी समझाना चाहिए कि गलती करना ठीक है क्योंकि ईमानदारी से समस्या हल करने का प्रयास करना पहली बार में ही सफल होने से ज़्यादा महत्वपूर्ण है। इस तरह वे स्वतंत्रता, आत्मविश्वास और समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करते हैं। प्यार, संवाद और भरोसे के साथ, बच्चे समझदारी से निर्णय लेना और बड़ी जिम्मेदारियाँ संभालना सीख जाते हैं।
Nov. 11, 2025, 2:22 p.m. | Tags: information health mentalhealth