बिहार राज्य के नवादा ज़िला से पूजा कुमारी ,मोबाइल वाणी के माध्यम से बच्चों की एक लोरी सुना रही है
नमस्कार कवि , मैं एच . पी . के . कुमार जी हूँ , मैं अमरावती रोमा हूँ । आपके सामने एक कविता है । कविता का नाम श्रीबुली दोपान है । एक तालाब में , श्रीबुली डोपान अपने माता - पिता , अपने दूसरे भाई और बहन के साथ रहती थी ।
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सिल को नमस्कार मेर नाम पंक कुमार है नावत अमर बानी फिश चक्की नानी है जेक कचापानी है हाथधा दर जाएगी बहन कर लो मरायेगी ।
सभी को नमस्कार , पानी बचाने के बाद भी पानी से बाहर नहीं निकलने वाली मिनाना किंकुमारी नवाजा मौहलवा नीचे चली गई हैं ।
मैं चेतक से बात करने जा रहा हूँ । चेतक करो अब चेतक की तप सुनाई दी । भक्लोनवाला के लोगों की भावनाएँ इसलिए हैं क्योंकि चेतक वर्मा ने उन्हें एक ऐसा जिला दिया है जो उनके साथ रहेगा । इस तरह की हरकत की गई है । भागो , तुम्हारा घोड़ा आगे बढ़ेगा । ता था उसी मरने से पहले उसके सिर के ऊपर से भाग गया । अपना घोड़ा रही है जो बड़ा जगाह बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत पहले जाते हैं , टॉप जम्पर गैर पर जाता था , खाना कभी अपने एक्शन दोपहर में । लेकिन वह आगे बढ़ता था , वह यह भूलकर पीछे मुड़ जाता था कि वह अपने पैर नहीं है , बल्कि हवा के घोड़े पर आसमान में उड़ता है , उसे एक घोड़ा लेने दें , उसे मरने से पहले मीजा बाउट से लड़ने दें ।
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