बिहार राज्य के नवादा ज़िला के नारदीगंज प्रखंड से बुलबुल कुमारी ,मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि क्या मोबाइल की लत मानसिक बीमारी है ?

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मोबाइल की लत को आधिकारिक रूप से मानसिक बीमारी नहीं माना गया है, लेकिन अगर इसे नियंत्रित न किया जाए तो यह मानसिक स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर गंभीर असर डाल सकती है। जब कोई व्यक्ति मोबाइल पर बहुत अधिक समय बिताता है, तो वह अपने आस-पास से अलग होने लगता है और हानिकारक आदतों में अधिक शामिल हो सकता है। खासकर सोशल मीडिया, गेम्स या वीडियो में ज्यादा समय बिताने से ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, चिंता, चिड़चिड़ापन, नींद की समस्या और कामकाज में कमी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। समय के साथ, यह आदत वास्तविक जीवन के रिश्तों और भावनात्मक संतुलन पर भी असर डाल सकती है। यह स्थिति तब चिंता का विषय बन जाती है जब व्यक्ति बिना मोबाइल के बेचैनी या चिंता महसूस करता है या फिर चाहकर भी अपने स्क्रीन टाइम को नियंत्रित नहीं कर पाता। इससे बचने के लिए, व्यक्ति को अपने मोबाइल उपयोग का समय सीमित करना चाहिए, खाने के समय या सोने से पहले मोबाइल दूर रखना चाहिए, और अधिक समय किताबें पढ़ने, व्यायाम करने या परिवार और दोस्तों से बातचीत करने जैसी ऑफलाइन गतिविधियों में बिताना चाहिए।
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Nov. 13, 2025, 3:08 p.m. | Tags: information   health   mentalhealth   children