#चूल्हे_की_अंगोर चूल्हे की अंगोर में, आग की रौशनी, जीवन की रोशनी में, मिलता है मुस्कानी। आग की बुझती नहीं, जब तक रात, चूल्हे का सिर सुनहरा, हर दर्द को कर देता है स्वीकार। चूल्हे की तापमान में, उबाल जाती है चाय, आग की तेजी में, बनती है जिंदगी की सबसे मिठी कहानी। चूल्हे के दामन में, होता है समृद्धि का फूल, आग का जादू, बनाता है हर दर्द को धूल। चूल्हे की रोटियों में, छुपी है जीवन की राह, आग की चमक में, है सच्चे सपनों की बात।
