सिमडेगा के तामड़ा में जतरा मेला को लेकर शुरुआती दौर से ही झाली मांगने की परंपरा है छोटे-छोटे बच्चे घर-घर जाकर पारंपरिक गीत गाकर धान व चावल आदि का संग्रह करते हैं जिसे यात्रा मेला में ले जाकर मुरही वह चूड़ा बदलाते है यह प्रथा 110 वर्षों से लगातार जारी है