मां दुर्गा के पट खुलते ही मां के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की उभड़ी भीड़ सोनपुर । दुर्गा पूजा को लेकर सोनपुर प्रखंड क्षेत्र के नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में चहल-पहल बनी हुई है। डुमरी बुजुर्ग में सप्तमी तिथि को लेकर माँ कालरात्रि स्थान में अहले सुबह से ही श्रद्धालुओं का ताता लग गया। नवरात्र में पूरे नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग नौ रूपों की पूजा करने का विशेष महत्व है। नवरात्रि के सातवें दिन माता कालरात्रि की पूजा की गयी । डुमरी बुजुर्ग स्थित महाकाल रात्रि मंदिर के पुजारी बृजेश आनंद मिश्र व सोना बाबा बताते हैं की धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता कालरात्रि की पूजा-अर्चना करने से सभी सिद्धियां प्राप्त होती हैं। तंत्र मंत्र के साधक मां कालरात्रि की विशेष रूप से पूजा करते हैं। वहीं, मां काली की आराधना करने से व्यक्ति भयमुक्त हो जाता है। साथ ही यह भी माना गया है कि मां काली अपने भक्तों की अकाल मृत्यु से रक्षा करती हैं। पुजारी ने बताया कि नवरात्र की सप्तमी तिथि की पूजा नवरात्र अन्य दिनों की तरह ही कर सकते हैं, लेकिन मां काली की उपासना करने के लिए सबसे उपयुक्त समय मध्य रात्रि का माना गया है। माँ दुर्गा के पूजा पंडाल में स्थापित माँ दुर्गा का पट शनिवार को पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार व विधिवत पूजा अर्चना के बाद शंख, ढोल ,नगाड़े बजाकर सोनपुर के गोला बाजार, महेश्वरी चौक ,रजिस्ट्री बाजार, भरपुरा समाधि स्थल, भरपुर मार्केट, भरपुरा महारानी चौक ,सबलपुर कचहरी बाजार ,नई बाजार, नयागांव बाजार ,परमानंदपुर बाजार ,कसमर बाजार,शिकारपुर, कल्याणपुर सहित प्रखंड क्षेत्र के दर्जनों मां दुर्गा के प्रतिमा का पट खोला गया । माता की भव्य प्रतिमा का पट खुलने के बाद माँ दुर्गा के दर्शन के लिए श्रद्धालु व भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। माता के दर्शन के लिए विभिन्न पूजा पंडालों में आये सैकड़ों श्रद्धालु भक्तों ने माता के जयकारे लगाते हुए माता के जयकारों से पूरा पूजा पंडाल गूँजमान हो उठा। श्रद्धालु भक्त माता की दर्शन कर पुजा अर्चना कर अपने तथा अपने परिवार के लिए मंगलकामना हेतु आशिर्वाद मांगा । पूजा समिति के सदस्यों द्वारा पुजा करने आये श्रद्धालु भक्तों के सुविधा को ख्याल रखते हुए उनके सहयोग के लिए पूजा समितियों के सदस्य मौजूद रहे । वही दुर्गा पूजा को शांति और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न करने के लिए स्थानीय प्रशासन भी पूरी तरह से चाक चौबंद व्यवस्था के साथ हर पूजा पंडाल के स्थलों का निरीक्षण करते हुए पूजा समिति सदस्यों को कई दिशा निर्देश देते रहे।