पहला रोजा मुकम्मल करने के बाद मासूमों के खिले चेहरे हुसैनगंज, एक संवाददाता। रमज़ान जैसे बाबरकत और रहमत के महीने में नौजवान व बड़े बूढ़े के साथ साथ छोटे बच्चे भी रोजा रख रहे हैं। अप्रैल में चल रही लू एवं तेज गर्मी में भूख तो फिर भी बर्दाश्त के काबिल है लेकिन नन्हे मासूम प्यास को काबू में करते हुए जैसे तैसे रोजा रख रहे हैं। प्रखंड के हुसैनगंज दक्खिन मुहल्ला निवासी फहीम अहमद की दोनो मासूम बेटियां बुशरा फात्मा और तौशिया फिरदौस ने गर्मी की तपिश के बावजूद अपना पहला रोजा मुकम्मल किया। रोज़ा मुकम्मल करने और अल्लाह के हुक्म की तामील करने की खुशी उनके चेहरे पर साफ देखी जा सकती थी। रोज़े के दौरान प्यास की शिद्दत और भूख चेहरे पर नुमायां थे मगर उस से कहीं ज़्यादा रोज़ा रखने और अल्लाह की इबादत करने का फख्र चेहरे पर दिखाई दे रहा था। दोपहर को धूप की तेज गर्मी ने बच्चों को विचलित ज़रूर किया किन्तु इबादत ने उन्हें अल्लाह की तरफ माईल रखा। रमज़ान का पहला रोजा दोनो बच्चियों ने इबादत के साथ गुज़ारा। बुशरा फात्मा (7 वर्ष) डीएवी क्लास 2 की स्टूडेंट है तो वहीं तौसिया फिरदौस (9 वर्ष) क्लास 4 की स्टूडेंट है। दोनों छोटी बच्चियों के पहला रोजा मुकम्मल करने पर इनको पूरे खानदान वालो ने मुबारकबादी दी। खास कर बच्चियों की दादी ने इनके उज्जवल भविष्य की कामना की।