इंटरमीडिएट परीक्षा के पहले दिन सोनपुर में दोनों पालियो में कुल 38 परीक्षार्थी रहे अनुपस्थित । 6 परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे के निगरानी में परीक्षार्थियों ने दी परीक्षा , स्कूल में पठन पाठन समयनुसार नही होने से परीक्षार्थियों को चेहरे पर आई मायूसी सोनपुर--: बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा आयोजित 2023 की इंटरमीडिएट सैद्धांतिक वार्षिक परीक्षा के लिए सोनपुर में 6 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे । जिसमें प्रथम दिन शांतिपूर्ण तरीके से बुधवार के दिन कदाचार मुक्त दोनों पालियों की परीक्षा संपन्न हो गई। प्रथम दिन की परीक्षा होने के कारण अहले सुबह परीक्षार्थी अपने परीक्षा केंद्रों पर पहुँच कर जमावड़ा लगाए हुए थे। परीक्षा केंद्र के बाहर ही मुख्य गेट पर केंद्राधीक्षक, मजिस्ट्रेट एवं पुलिस बल के द्वारा परीक्षार्थियों की सघन तलाशी लेकर परीक्षा केंद्र के अंदर प्रवेश करने की इजाजत दी गयी । ताकि किसी भी प्रकार की नकल सामग्री परीक्षार्थी अपने साथ ना ले जा पाए।स्थानीय प्रशासन द्वारा नियुक्त दंडाधिकारी एवं उड़नदस्ता दल ने 6 परीक्षा केंद्रों का परीक्षा अवधि में चक्कर लगाते रहे तथा केंद्राधीक्षको एवं वीक्षण कार्य में लगे शिक्षकों को दिशा निर्देश जारी करते नजर आए।इंटरमीडिएट परीक्षा के प्रथम दिन प्रथम पाली में मैथ की परीक्षा संपन्न हुई वही दूतीय पाली में हिंदी के परीक्षा हुई । इस बात की जानकारी देते हुए सोनपुर अनुमंडल पदाधिकारी सुनील कुमार ने बुधवार के दिन बताया कि सोनपुर में 6 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। जिसमें सभी परीक्षा केंद्रों में कुल 3759 परीक्षार्थी में 38 परीक्षार्थी दोनों पालियों में अनुपस्थित रहे । कूल 3721 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी है। उन्होंने बताया कि प्रथम पाली में 14 जबकि दूतीय पाली में 24 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। प्रथम पाली में 1839 जबकि द्वितीय पाली में 1920 परीक्षार्थी को परीक्षा देना था जिसमें प्रथम पाली में 1825 जबकि द्वितीय पाली में 1896 परीक्षार्थी ने परीक्षा दिया । प्रथम दिन दोनों पालियो में शांतिपूर्ण व कदाचार मुक्त परीक्षा संपन्न हुआ । प्रथम दिन इंटरमीडिएट के वार्षिक परीक्षा में परीक्षार्थियों के चेहरे पर मायूसी देखी गई। नाम व स्कूल न बताने की शर्त पर कई परीक्षार्थियों ने बताया कि सरकार ने इंटरमीडिएट की वार्षिक परीक्षा तो ले रही है लेकिन स्कूल में शिक्षक के अभाव में पठन-पाठन समयनुसार से नहीं हुई है जिससे प्राइवेट शिक्षकों से पढ़कर कुछ तैयारी किए हैं । अगर सरकार के द्वारा नियुक्त किए गए शिक्षक के भरोसा रहे तो विद्यार्थियों का भविष्य चौपट हो सकता है । सरकार ने 10 प्लस टू में समाहित तो कर दी लेकिन शिक्षक की नियुक्ति सही समय से नहीं होने से विद्यार्थियों का पठन-पाठन में कठिनाई हो रही है जिसके कारण से परीक्षार्थियों को परीक्षा देने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है ।