पुलिस एससी एसटी सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोपितों की कर रही है तलाश।

प्रमोशन होने पर मित्रों सहित अधिकारियों ने भी दी बधाई

पुलिस अधिकारी के आदेश पर पति समेत 8 लोगों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज

वाराणसी के शिवपुर थाना अंतर्गत कोईरान-चमाँव में रहने वाले सरकारी कर्मचारी श्री अरविन्द कुमार श्रीवास्तव और उनके परिजन पूरे 5 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद, शनिवार की रात, चैन की नींद सो पाये। हुआ यह कि उनके घर के ठीक बगल में स्थित प्लॉट पर श्री बबलू पटेल ने पॉवरलूम लगा रखा है जिसके दिन-रात चलने से होने वाले ध्वनि प्रदूषण से मोहल्ले के अन्य लोग भी परेशान थे। कुछ साल पहले, अरविन्द श्रीवास्तव के साथ ही मोहल्ले के पंकज श्रीवास्तव, सरिता देवी, लक्ष्मी सिंह, सरोज राय, अंजू पाण्डेय, सौरभ यादव, तूलिका राय, मंजिल कुमार, शिवबली सिंह आदि लोगों ने मीटिंग की और सभी लोगों ने संयुक्त रूप से मिलकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल सहित कई जगहों पर शिकायती प्रार्थना पत्र दिया। मगर तमाम पत्रों के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं हुई और इस बीच पॉवरलूम मशीन के कंपन से सबसे नजदीक में रहने वाले अरविन्द श्रीवास्तव के घर के सदस्यों की तबियत ज्यादा ही बिगड़ती गई और उनके घर की दीवार में कई जगह दरारें (Crack) भी पड़ती गईं। बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पा रही थी। पत्नी श्रीमती रेनू श्रीवास्तव अनिद्रा और मानसिक तनाव का शिकार हो गईं। दिन रात मशीन चलने से परिवार के मुखिया श्री अरविन्द कुमार श्रीवास्तव (मोबाइल: 9140787271) को न्यूरोलॉजिकल समस्या हो गई और सितंबर 2023 से उनका डॉ वी.डी. तिवारी (गैलेक्सी अस्पताल, वाराणसी) के यहाँ इलाज शुरू हो गया। मगर पॉवरलूम बंद होने का कोई आसार नहीं दिख रहा था। फिर मार्च 2024 में उनको मीडिया के माध्यम से ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ अभियान चलाने वाली संस्था 'सत्या फाउण्डेशन' के बारे में पता चला और उन्होंने संस्था के हेल्पलाइन नंबर 9212735622 पर संपर्क किया। संस्था के सचिव चेतन उपाध्याय ने पीड़ित परिवार की समस्या को शिकायती प्रार्थना पत्र के साथ, वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट के कैंट सर्किल के ए.सी.पी. श्री विदूष सक्सेना (मोबाइल: 9454401639) से मुलाकात की और उन्हें ध्वनि प्रदूषण (विनियमन व नियंत्रण) नियम-2000 की प्रति भी उपलब्ध करायी जिसमें यह साफ-साफ लिखा हुआ है कि आवासीय इलाके में किसी भी प्रकार के शोर को नियंत्रित या बंद करने की शक्ति, केवल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ही नहीं, बल्कि पुलिस उपाधीक्षक (ए.सी.पी.) या इससे ऊपर के अधिकारी को भी है। ए.सी.पी. महोदय ने कानून की इस बारीकी को ध्यान से समझा और मामले को गंभीरता से लेते हुए उचित कार्यवाही का भरोसा दिया। इसके बाद उनके निर्देश पर शनिवार, 16 मार्च 2024 की शाम को, पुलिस बल ने मौके पर पहुँच कर पावरलूम मशीन के मालिक श्री बबलू पटेल को बताया कि आवासीय इलाके में पावरलूम मशीन चलाना अपराध है और दोषी को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम- 1986 के अंतर्गत ₹1,00,000 तक का जुर्माना या 5 साल तक की जेल या एक साथ दोनों सजा हो सकती है। इसके बाद यह तय किया गया कि उक्त पावरलूम मशीन को सुबह 8:00 बजे से रात्रि 8:00 तक ही चलाया जाएगा और 1 महीने के अंदर या तो कारखाने को साउण्ड प्रूफ कर लिया जाएगा या फिर अत्याधुनिक ध्वनि विहीन (साउंडलेस) मशीन लगा ली जाएगी अन्यथा कानून के उल्लंघन की स्थिति में उचित धाराओं में वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद उक्त पावरलूम मशीन के मालिक ने रात्रि 8:00 बजे ही अपनी मशीन को बंद कर दिया और आज रविवार सुबह 8:00 बजे के बाद ही अपनी मशीन दोबारा चालू की। इस तरह से लगभग 5 साल के बाद श्रीवास्तव परिवार के सदस्य रात की गहरी नींद ले पाए। पुलिस की उक्त कार्रवाई से श्रीवास्तव परिवार के साथ ही मोहल्ले के लोगों में बहुत अधिक खुशी का माहौल है कि दुनिया में ईमानदार अधिकारी और ईमानदारी अभी भी जिंदा है।

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