छत्तीसगढ़ राज्य के जिला राजनंद गाँव से विरेन्द्र , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते है की राजनीतिक साधनों से महिलाओं की स्थिति में सुधार कभी संभव नहीं है। एक महिला को मनुष्य नहीं माना जाता है, उसे केवल एक मशीन माना जाता है। चलने के कारण, उससे आवश्यकता से अधिक अपेक्षा की जाती है और जब वह अपेक्षा पर खड़ी नहीं होती है, तो उसके साथ अन्याय किया जाता है। इसलिए राजनीतिक सोच में अब महिला को सरपंच, पंच और पार्षद बना दिया गया है। ऐसा नहीं हुआ कि सारे काम उनके पुरुषों द्वारा किए जा रहे हैं, इसलिए सशक्तिकरण राजनीति से नहीं आएगा, लेकिन महिलाएं राजनीति से निश्चित रूप से आगे आएंगी, लेकिन वे कोई प्रगति नहीं कर पाएंगी, वे एक खाली मूर्ति पर बैठेंगी या वे खुलकर बोल नहीं पाएंगी। यदि वह अपना निर्णय लेने में सक्षम नहीं है, तो इसके लिए पुरुष प्रधान समाज में सोच को बदलने की आवश्यकता है। आधुनिक युग में अगर उनमें नई सोच है तो उन्हें भी इंसान माना जाना चाहिए और उन्हें अधिकार भी दिए जाने चाहिए। उसकी मदद पीछे से की जानी चाहिए, लेकिन उसकी मदद की जानी चाहिए।
