संवाददाता सुशांत पाठक 24/03/2024 रविवार को भद्रा प्रातः 9:24 से प्रारंभ होकर रात्रि 10:27 तक रहेगा। भद्रा समाप्त होते ही होलिका दहन रविवार को फाल्गुन पूर्णिमा तिथि पर रात्रि 11:13 से 12:27 के बीच किया जाएगा। होलिका जलते ही फाग गीत गूंज उठेंगे और होलियारों की टोली मस्ती में डूब जाएगी। होलिका की परिक्रमा करने और अन्न की आहुति देने से पद प्रतिष्ठा एश्वर्य की प्राप्ति होती है। पुराणों के अनुसार हमें जीवन के लिए जरूरी सभी चीजें प्रकृति से ही मिलती हैं, और जो भी चीज हमें प्रकृति से मिलती है, वही चीजें हम भगवान को समर्पित करके आभार व्यक्त करते हैं। होली के समय में गेहूं चने के साथ कई अन्य फसलें पक जाती हैं। फसल आने पर उत्सव मनाने की परंपरा है। पुराने समय से ही जब फसल पकती है तब होली जलाकर उत्सव मनाया जाता है, जलती होली को यज्ञ मानकर नया अन्न भगवान को अर्पित किया जाता है। तंत्र साधना के लिए बहुत खास होती है रविवार की होलिका दहन जब रविवार को होलिका दहन होता है, तो ये रात तंत्र साधना के लिए बहुत खास होती है तंत्र साधक होलिका दहन की रात अपने इष्ट देव का विशेष पूजन करते हैं गुरु के मंत्रों का जाप करते हैं। रात में जागकर तपस्या और ध्यान किया जाता है। भविष्य पुराण के अनुसार नारद जी के कहने पर युधिष्ठिर ने फाल्गुन पूर्णिमा पर कई बंदियों को अभय दान दिया था। बंदियों को मुक्त करने के बाद कंडे जलाकर होली मनाई गई थी। होलिका दहन में आहुतियां देना बहुत ही जरूरी माना गया है, होलिका में कच्चे आम, नारियल भुट्टे ,या सप्तधान्य , नई फसल का कुछ भाग गेहूं, उड़द ,मूंग, चना, जौ, चावल ,मसूर आदि की आहुति दी जाती है। ऐसा करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही गुप्त शत्रुओं का नाश होता है। साथ ही आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। वही होलिका दहन की रात्रि तंत्र साधना के रात्रि होने के कारण इस रात्रि आपको कुछ सावधानियां रखनी चाहिए सफेद खाद्य पदार्थों की सेवन से बचें मानता है, होलिका दहन वाले दिन टोने टोटके के लिए सफेद खाद्य पदार्थ का उपयोग किया जाता है। इसलिए इस दिन सफेद खाद्य पदार्थों के सेवन से सावधानी बरतें।
