रपटे के चौड़ीकरण में रुकावट बनी दुकानों को हटाया ।
दिव्यांग बच्चों ने प्रतियोगिताओ में लिया बढ़ चढ़कर हिस्सा।
भारतीय मानसिकता का अध्ययन बताता है कि ईश्वर व धर्म के प्रति हमारी श्रद्धा व आस्था की जडे़ काफी गहराई तक स्थापित हो चुकी है। शिक्षा के प्रसार व इस के बाद वैज्ञानिक दृष्टिकोण स्थापित करने के लिए विवेकवादी, तर्कशील, रेषनालिस्ट जैसे संगठनों द्वारा समाज में अंधविश्वास उन्मूलन के लिए किए जाने वाले जनजागरण अभियान के दौरान यह आरोप भी उठते है कि यह लोग हमारे इश्वर व धर्म का विरोध करते है। अंधविश्वास उन्मूलन यानी श्रद्धा व आस्था का विरोध माना जाता है। इश्वर व धर्म के प्रति यही श्रद्धा व आस्था अंधविश्वास उन्मूलन के अभियान को प्रभावित भी करने लगता है। समाज में अंधविश्वास उन्मूलन के साथ ईश्वर व धर्म की कथित रूप से गढ़ी गई परिभाषा से बहार निकलना कठीन हो जाता है। आज हम बात करेंगे क्या ईश्वर व धर्म अंधविश्वास का मूल कारण है?
मेरा गांव मेरी पहचान कार्यक्रम के तहत आज हमसे खास बातचीत करने व अपनी राय देने के लिए जुड़े ग्राम खूटाम्बा के निवासी सौरभ यादव जी।
लड़कियों और महिलाओं के ख़िलाफ़ हो रही हिंसा रोकने के लिए शुरू हुए इस प्रोग्राम में आपका स्वागत है। किसी भी तरह की हिंसा रोकने के लिए समाज में रहने वालों के सोच-विचार बदलना बहुत ज़रूरी है।आज इस बारे में हम बात करेंगे पुरुषों के योगदान को लेकर और जानेंगे कि पुरुष किस तरह महिला कल्याण और सशक्तिकरण को बढ़ावा दे सकते है।पुरुषों की भागीदारी से जेंडर के नाम पर होने वाली हिंसा को कैसे ख़त्म किया जा सकता है। अपने विचार ज़रूर रिकॉर्ड करें, फोन में नंबर 3 दबाकर।
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दोस्तों, अगर गौर किया जाए तो हमारे आसपास होने वाली छोटी—बड़ी लड़ाईयों, झगड़ों, बहस और नाखुशी के पीछे की वजह अधिकारों का हनन है। महिला है तो उससे आत्मनिर्भर बनने का अधिकार छीन लिया जाता है, बच्चा है तो पढने का, किसी से जाति के नाम पर तो किसी से गरीबी के नाम पर अधिकारों का हनन जारी है और यही है फसाद की वजह। आज जब हम 10 दिसंबर को मानव अधिकार दिवस मना रहे हैं तो फिर एक बार इस विषय पर बात करना जरूरी हो जाता है
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