कोई भी काम बैठे-बैठे पूरा नहीं हो जाता उसके लिए पहल भी करनी पड़ती है कुछ लोग जीवन में बहुत कुछ पाना चाहते हैं लेकिन उसे हासिल करने के लिए कुछ करते नहीं बैठकर सही वक्त आने का इंतजार करते हैं जब वक्त गुजर जाता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है हर नया दिन हमें अपनी राह चुनने का नया मौका देता है यह हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हम इस दिन और वक्त का इस्तेमाल सूझबूझ से करते हैं यह बैठे-बैठे गवा देते हैं
