और 18 मार्च को रंगों से होली खेली जाएगी यह पर्व असुर हिरण कश्यप पर भगवान विष्णु की विजय के साथ ही राधा और कृष्ण के प्रेम को मनाता है हालांकि भारतीय संस्कृति के इस त्योहार को मनाने की सिर्फ कल्चरल वजह नहीं है होली मनाने के पीछे कुछ बायोलॉजिकल और एनवायरमेंटल कारण भी है जो आपको हैरान कर देंगे इनमें स्वास्थ्य बेहतर करने से लेकर आपका मोड़ पोस्ट करने वाली प्रक्रिया तक शामिल है आइए जानते हैं होली के महत्व को समझते हैं मान्यताओं के अनुसार होलिका को आग में ना जलने का वरदान मिला हुआ था लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से वह चल गई और पहलाद बच गया था इसलिए आज भी होलिका की प्रतिमा को जलाने की परंपरा है हालांकि साइंटिफिक नजरिए से देखा जाए तो परंपरा वातावरण में मौजूद बैक्टीरिया को खात्मा करती है क्योंकि इस मौसम में इनकी ग्रोथ जल्दी होती है होलिका दहन के समय परिक्रमा करने की भी परंपरा है आपकी गर्मी से हमारे शरीर पर मौजूदा कीटाणु मर जाते हैं देश के कुछ हिस्सों में लोग होलि का दहन के बाद रात को अपने माथे पर लगाते हैं साथ ही इसमें चंदन और आम के पत्ते और फूल को मिलाकर भी लगाया जाता है माना जाता है कि यह परंपरा अच्छी सेहत को बढ़ावा देती है इसके अलावा राख लगाने से हमारे अंदर और घर की नेगेटिविटी भी दूर होती है