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देशभर में कोरोना वायरस के मामलों में लगातार तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. बीते 24 घंटों में कोविड-19 के करीब 90 हजार नए मामले सामने आए हैं, जबकि 714 लोगों की मौत हुई है. कोरोना वायरस के मौजूदा हालातों को देखते हुए सरकार पहले ही वैक्सीनेशन अभियान में तेजी लाने के निर्देश दे चुकी है.विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे देशव्यापी आंदोलन के मद्देनजर अपनी सरकार को ‘किसान हितैषी’ दिखाने के एजेंडा के तहत 13 जनवरी को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का गुणगान किया और योजना के पांच साल पूरा होने को लेकर किसानों को बधाई दी थी. हालांकि आधिकारिक दस्तावेज दर्शाते हैं कि किसानों द्वारा दायर किए गए फसल बीमा दावों को खारिज करने की संख्या में नौ गुना की बढ़ोतरी हुई है.विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
देशभर में कोरोना वायरस की दूसरी लहर का कहर देखने को मिल रहा है. चीन से आया कोरोनावायरस नए साल में भी रोजाना नए रिकॉर्ड बना रहा है. भारत में बीते 24 घंटों में कोविड-19 के 56,211 नए मामले सामने आए हैं, जबकि 271 लोगों ने महामारी की वजह से अपनी जान गंवाई है। इस खबर को सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।
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कोरोना के खिलाफ लोगों में हर्ड इम्युनिटी के लिए अब तक देश में छह करोड़ लोग वैक्सीन ले चुके हैं। इनमें करीब आधे बुजुर्ग हैं। स्वास्थ्यकर्मी व फ्रंटलाइन वर्कर अभी भी टीकाकरण में कम सहभागिता कर रहे हैं। वहीं देश के आठ राज्यों में सबसे ज्यादा टीका लगाया गया। बाकी राज्य अभी भी हर्ड इम्युनिटी से काफी दूर हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, हर्ड इम्युनिटी बनने से वायरस का असर कम हो सकता है।विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।
दुनिया भर में शहरों को साफ रखने वाले वेस्ट वर्कर की आबादी 2 करोड़ से अधिक है. कोरोनावायरस महामारी के इस दौर में इनके लिए खतरे बड़े हैं. यह साफ सफाई करने वाले वेतन भोगी कर्मियों के अलावा शहरों को साफ करने का काम करते हैं. दुनिया भर में नगर निगम के वर्कर को कोरोनावायरस की वैक्सीन दी जा चुकी है और उन्हें फ्रंटलाइन वर्कर की तरह देखा जाता है, लेकिन वेस्ट वर्कर को अब तक कहीं भी कोरोना वैक्सीन नहीं लग पाई है.विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
लॉकडाउन के दौरान मजदूर जैसे—तैसे अपने घर पहुंचे थे. शहरों से दाना पानी उठने के बाद उनके पास केवल अपना गांव बचा था. लेकिन जब लॉकडाउन खुला तो वे काम की तलाश में फिर शहरों की ओर बढ गए. पर जब से कोरोना की दूसरी लहर ने देश में दस्तक दी है तब से मजदूरों का पलायन फिर शुरू हो गया है। विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।
