देश में कोरोना महामारी के जोखिम के बीच शहरों से लेकर दूरदराज के गांवों तक घर-घर जाकर आंकड़े जुटाने का काम कर रहीं मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता यानी आशा कार्यकर्ताओं ने सरकार की भेदभावकारी नीतियों के खिलाफ बिगुल बजा दिया है. आशा कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के समक्ष अपनी कई मांगें रखी हैं, जिनमें इनका नियमित वेतन सुनिश्चित करना, सरकारी कर्मचारियों के तौर पर मान्यता देना, कोरोना वॉरियर्स के तौर पर इनके लिए बीमा राशि का बंदोबस्त करना शामिल हैं। विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।
आपके पसंदीदा शिक्षक डॉक्टर विजय कुमार गुप्ता आज अर्थशास्त्र विषय में विस्तारपूर्वक मुद्रा की पूर्ति और मांग के बारे में समझा रहें है। तो जल्दी से क्लिक करे ऑडियो पर और सुने आज की कड़ी।
दोस्तों, गलीगली सिम सिम कार्यक्रम के आज की कड़ी में हम सुनेंगे की हमे सुबह उठकर हमे क्या क्या करना चाहिए। तो आइये सुनते है गुगली और चमकी की चटपटी बातें। आप भी लिंक पर क्लीक करें और सुने इस कहानी को ।
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भारतीय रेलवे की ओर से कहा गया है कि सभी नियमित यात्री ट्रेन सेवाएं अगले आदेश तक निलंबित रहेंगी. वहीं 230 विशेष ट्रेनें चलती रहेंगी. रेलवे ने एक बयान में यह जानकारी दी.रेलवे ने कहा कि विशेष ट्रेनों में यात्रियों की संख्या पर नियमित नजर रखी जा रही है और आवश्यकता के आधार पर अतिरिक्त विशेष ट्रेनें चलाई जा सकती हैं। सुनने के लिए ऊपर के ऑडियो पर क्लिक करें।
नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस के मुताबिक, 2012 के बाद से बेरोजगारी और घरेलू कर्ज में तेज़ वृद्धि हुई है. इससे देश के गरीबों के लिए जरूरी न्यूनतम जीवन स्तर बनाए रखना और मुश्किल हो गया. 2017-18 में देश की श्रम शक्ति का 3 करोड़ या 6.1 प्रतिशत हिस्सा बेरोजगार था. 2021 के वित्तीय वर्ष में, मंदी और मुख्य रूप से कोविड-19 के कारण अर्थव्यवस्था की हालत और बिगड़ रही है.विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
आपके पसंदीदा शिक्षक डॉक्टर डॉ एन के शर्मा आज राजनीति शास्त्र विषय पर "शीत युद्ध" के सन्दर्भ में महत्वपूर्ण जानकारी विस्तारपूर्वक समझा रहें है।तो जल्दी से क्लिक करे ऑडियो पर और सुने आज की कड़ी।
कोविड-19 के कारण लंबे चले लॉकडाउन ने प्रवासी मजदूरों से उनका रोजगार छीन लिया. भूखे मरने की नौबत आ रही थी कि तभी मनरेगा ने उन्हें सहारा दिया. मार्च से जून, 2020 के बीच लॉकडाउन के विभिन्न चरणों के दौरान लाखो मजदूर पैदल या फिर किसी अन्य संसाधन से किसी तरह गांव पहुंचे थे पर इतने लोगों को मनरेगा में काम देना भी किसी चुनौती से कम नहींं। सुनने के लिए ऊपर के ऑडियो पर क्लिक करें।
एक बेटी को अपने पिता की संपत्ति में बराबर का अधिकार है. यह बात सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कही. शीर्ष अदालत ने कहा कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 2005 के तहत बेटियों को ये अधिकार प्राप्त है और इससे कोई मतलब नहीं है कि इस कानून के संशोधन के समय लड़की के पिता जिंदा थे या नहीं. आपको बता दें कि साल 2005 में इस कानून में संशोधन कर पिता की संपत्ति में बेटा और बेटी को बराबर का हिस्सा देने का अधिकार दिया गया था.विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
