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आशा कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी गई है कि वे घर—घर जाकर कोविड मरीजों की संख्या का सही पता लगाए. यह काम जितना कहने में आसान है उतना ही मुश्किल भरा है. सही मायनों में देखा जाए तो मुश्किल से ज्यादा खतरों से भरा है. क्योंकि इन कार्यकर्ताओं के पास अपनी सुरक्षा का कोई जरिया नहीं है.विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर। 

कोरोना वायरस की वैक्सीन अब भी खोजी नहीं जा सकी है. लेकिन जबसे कोरोना वायरस महामारी फैली है तभी से सोशल मीडिया पर इसके लिए घरेलू नुस्खों की भरमार है. इसी तरह का एक नया नुस्खा सामने आया है. फेसबुक और वॉट्सएप पर एक मैसेज वायरल हो रहा है जिसमें दावा किया जा रहा है कि कोरोना वायरस के कारण इजरायल में एक भी मौत नहीं हुई है, क्योंकि वे लोग चाय में नींबू और बेकिंग सोडा मिलाकर पी रहे हैं। सुनने के लिए ऊपर के ऑडियो पर क्लिक करें। 

कोरोना के मद्देनजर लॉकडाउन के दौरान 85 फीसदी से अधिक प्रवासी मजदूरों ने घर लौटने के लिए खुद अपनी यात्रा टिकट का भुगतान किया है. एक स्वयंसेवी संगठन स्ट्रैंडेड वर्कर्स एक्शन नेटवर्क का कहना है कि 85 फीसदी से अधिक मजदूरों को घर लौटने के लिए अपनी यात्रा के खर्च का खुद भुगतान करना पड़ा है। सुनने के लिए ऊपर के ऑडियो पर क्लिक करें। 

देश में कोरोना का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है.कोविड-19 के संक्रमितों की संख्या देश में 3 लाख के बेहद करीब पहुंच गई है.हालांकि अच्छी खबर यह है कि 1 लाख 47 हजार से अधिक लोग अस्पताल में इलाज के दौरान ठीक हुए हैं. देश एक तरफ कोरोना से लड़ रहा है तो दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर वायरल हो रही भ्रामक खबरें लगातार चुनौती बनती जा रही है.विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और राज्यों को निर्देश दिया कि कोरोना महामारी की वजह से लागू लॉकडाउन के दौरान अपने श्रमिकों को पूर्ण पारिश्रमिक नहीं देने वाली निजी कंपनियों के खिलाफ जुलाई के अंतिम सप्ताह तक कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें। 

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप और लॉकडाउन के मद्देनजर देशभर के अधिकतर मजदूर अपने गृह राज्य पहुंच चुके हैं. अब इन प्रवासियों के सामने रोजगार का संकट आ खड़ा हुआ है, जिसे देखते हुए सरकार ने मास्टर प्लान तैयार कर लिया है. उपयोगिता और योग्यता के आधार पर इन प्रवासी मजदूरों को उनके गृह राज्य में ही रोजगार दिलवाया जाएगा.विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

कोरोना के कारण सरकारें आर्थिक मंदी से गुजर रही हैं पर इसका अर्थ ये बिल्कुल नहीं है कि वे अपने ही कर्मचारियों की छंटनी कर दें. सरकार बार बार लोगों को विश्वास दिला रही है कि उनकी नौ​करियां सुरक्षित हैं फिर भी अफवाहें हैं कि कम होंने का नाम नहीं ले रहीं. ऐसी ही एक अफवाह फैल रही है कि केन्द्र सरकार 5 लाख केन्द्रीय कर्मचारियों को नौकरी से बाहर निकालने की तैयारी कर रही है.विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप और लॉकडाउन के मद्देनजर देशभर के अधिकतर मजदूर अपने गृह राज्य पहुंच चुके हैं. अब इन प्रवासियों के सामने रोजगार का संकट आ खड़ा हुआ है, जिसे देखते हुए सरकार ने मास्टर प्लान तैयार कर लिया है. उपयोगिता और योग्यता के आधार पर इन प्रवासी मजदूरों को उनके गृह राज्य में ही रोजगार दिलवाया जाएगा.विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

देश में कोरोना का संक्रमण तेजी से बढ़ता जा रहा है. स्‍वास्‍थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार देश में कोरोना के 276583 केस सामने आ चुके हैं और 7745 लोगों की मौत हो चुकी है.विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।