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दोस्तों, कोरोना वायरस से बचने के लिए लोग घरों में बंद हैं. ऐसे में खबरों की जानकारी के लिए लोग सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं. कोरोना वायरस को लेकर जैसे ही कोई खबर सामने आती है लोग वॉट्सएप के जरिए अपने दोस्तों को फॉरवर्ड करने लगते हैं. बिना यह जाने कि वह सही जानकारी है या गलत. ऐसी एक खबर इन दिनों फॉरवर्ड की जा रही है कि पत्तागोभी खाने से कोरोना हो सकता है. यहां तक की इस दावे को डब्लूएचओ की तरफ से प्रसारित बताया जा रहा है. अमर उजाला डॉट कॉम ने अपनी जांच में इस तथ्य को गलत पाया. साथ ही भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय ने भी इस दावे को झूठ बताया है. यह सही बात है कि पत्तागोभी को ठीक से पकाकर खाना चाहिए पर यह गलत है कि इसे खाने से कोरोना फैलता है. इसलिए आप ऐसी किसी भी भ्रामक जानकारी को सच ना मानें. साथ ही सजग रहते हुए किसी भी अफवाह के बारे में हमें बताएं अपने फोन में नम्बर तीन दबाकर.
पूरे देश में लॉकडाउन जारी है और इसका उल्लंघन करने वालों पर सख्ती भी हो रही है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि सख्ती की झूठी खबरों पर भी यकीन कर लिया जाए. हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें एक पुलिसकर्मी घायल हालत में मंदिर के अंदर फर्श पर लेटा है और कुछ लोग उसे मार रहे हैं. इस वीडियो के साथ दावा किया गया कि पुलिसकर्मी का ये हाल लॉकडाउन की सख्ती के कारण हुआ है. जब इंडिया टुडे ने इस वीडियो की जांच की तो पता चला कि ये वीडियो नाटकीय है और मनोरंजन के लिए बनाया गया है. सीडब्लूई नाम के एक यूट्यूब चैनल ने इस वीडियो को पिछले साल जून में अपलोड किया था. ना तो किसी पुलिसवाले पर हमला हुआ है ना ही वो दावा सच है. इसलिए आप से अपील है कि ऐसे वीडियोज को फारवर्ड ना करें. बल्कि आपके के आसपास ऐसी कोई गलत अफवाह फैल रही है तो उसे रोके. या फिर हमें बताएं अपने फोन में नम्बर तीन दबाकर.
वॉट्सऐप पर एक मेसेज काफी शेयर किया जा रहा है जिसमें डब्लूएचओ का एक लेटर है. जिसमें लिखा है कि भारत कोरोना संक्रमण के दूसरे चरण में है और लॉकडाउन की प्रक्रिया लिखी हुई है. लेटर के अनुसार भारत में 10 जून तक लॉकडाउन चलेगा और ऐसे निर्देश डब्लूएचओ ने दिए हैं. जब एनबीटी समाचार एजेंसी ने इस लेटर की सच्चाई खंगाली तो पता चला कि यह दावा गलत है. वह डब्लूएचओ ने ऐसे कोई दिशा निर्देश जारी नहीं किए हैं. भारत में लॉकडाउन पर फैसला भारत सरकार लेगी और ये समय और हालातों को देखते हुए लिया जाएगा. इसलिए आप ना तो इस लेटर का विश्वास करें और ना ही इसे फारवर्ड. इसके अलावा अगर आपको किसी भ्रामक खबर के बारे में पता चलता है तो हमें जरूर बताएं. फोन में नम्बर तीन दबाकर
दोस्तों, लॉकडाउन का मतलब है कि घर पर रहें, खुद को समाज को सुरक्षित रखें. पर ऐसा नहीं है कि अगर आप घर के बाहर कदम रखेंगे तो पुलिस गोली मार देगी. पर फिलहाल कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर आप ये देख सुन रहे होंगे कि घर से निकलने वालों को गोली मार दी जाएगी. इस तथ्य के बारे में एशियानेट न्यूज डॉट कॉम ने पता लगाया है और दावा किया है कि ये बात पूरी तरह से गलत है. कुछ शरारती तत्व लोगों को डारने के लिए ऐसा कर रहे हैं. ऐसा करने वाले दो युवको के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कर ली गई है. तो आप ऐसी किसी भी गलत खबर का विश्वास ना करें. हां यह जरूरी है कि आप लॉकडाउन के नियमों का पालन करें पर ऐसा नहीं है कि ना करने पर कोई आपको गोली मार दे. इसलिए केवल सही खबरों को ही प्रसारित करें. अगर आपके पास भी ऐसी किसी अफवाह की जानकारी है तो उसकी जांच कर मोबाइलवाणी पर रिकॉर्ड करें. रिकॉर्ड करने के लिए फोन में अभी दबाएं नम्बर तीन.
दोस्तों, इन दिनों कोरोना के कारण पूरी दुनिया के लोग डरे हुए हैं. लोग एक दूसरे से दूर रह रहे हैं, इतना दूर कि वो कोरोना वायरस के कारण मरे हुए शख्स को हाथ लगाने से भी डर रहे हैं. ऐसे भ्रामक खबरें इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं. जिसमें लाशों का ढेर दिख रहा है और बताया जा रहा है कि उनकी मौत कोरोना के कारण हुई है. लोग वायरस होने के डर से उनका अंतिम संस्कार नहीं कर रहे हैं. जबकि एशियानेट न्यूज डॉट कॉम ने अपनी जांच में इस तथ्य को गलत पाया है. दरअसल डब्लूएचओ के अनुसार कोरोना पीडितों के शवों से वायरस का संक्रमण नहीं होता. अब तक दुनिया में ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है. कोरोना वायरस व्यक्ति के मर जाने के बाद उसके साथ ही मर जाता है. इसलिए आप ऐसे भ्रामक खबरों पर यकीन ना करें बल्कि पहले पूरी जांच कर लें कि तथ्य सही है या नहीं. इसके अलावा अगर आपको किसी अफवाह की जानकारी मिलती है तो उसकी जांच कर मोबाइलवाणी पर नम्बर 3 दबाकर रिकॉर्ड भी करें. ताकि लोग भ्रमक खबरों के जाल में ना फंसकर एक—दूसरे की मदद कर सकें.
दोस्तों, हाल ही में एक वीडियो फेसबुक और बाकी सोशल मीडियापर काफी वायरल हुआ है, जिसमें एक शख्स फलों पर थूक लगाता दिखाई दे रहा है. इसके वायरल होने की एक खास वजह ये है कि यह एक खास धर्म से संबंधित है और दूसरे धर्म के लोग इसे मसला बनाएं हुए हैं. कहा जा रहा है कि ये व्यक्ति कोरोना फैलाने के लिए ऐसा कर रहा है. जब इस वीडियो की जांच की गई तो पता चला कि ये मप्र के रायसेन जिले का है. पुलिस को जांच में पता चला कि ये वीडियो एक साल पुराना है और इसका कोरोना फैलाने से कोई संबंध नहीं है. हालांकि ऐसा करना अपराध है इसलिए पुलिस ने उस फल विक्रेता के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है. इन तथ्यों की जांच न्यूज 18 वेबवसाइट के द्वारा की गई है.
दोस्तों, दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज में मार्च में तबलीगी जमात का एक कार्यक्रम आयोजित हुआ था. पिछले दिनों उस कार्यक्रम में शामिल हुए कुछ लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं. इसके बाद से ही सरकार इस कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों को ढूंढ कर स्कैन करने में लगी है. लेकिन इस बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें एक विशेष धर्म की प्रार्थना सभा चल रही है और लोगों को छींके आ गईं. दावा ये किया जा रहा है कि ये सब कोरोना फैलाने के लिए जानबूझकर किया जा रहा है. जब जांच की गई तो पता चला कि 29 जनवरी 2020 को यह वीडियो फेसबुक पर पोस्ट किया था. वायरल वीडियो में लोग जिकिर/धिकर कर रहे हैं. यह इबादत करने का सूफी तरीका है, आमतौर पर सूफिज्म में ऐसा किया जाता है. लोग जिकिर में बार-बार एक ही प्रार्थना पढ़ते हैं. यानि इस वीडियो का कोरोना फैलाने और मरकज विवाद से कोई लेना देना नहीं है. इन तथ्यों की जांच दा लॉजिकल इंडियन डॉट कॉम वेबसाइट द्वारा की गई है.
