बिहार राज्य के नालंदा ज़िला के नगरनौसा प्रखंड से 35 वर्षीय सपना देवी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि डिप्रेशन से बचाव के लिए क्या करना चाहिए ?क्या इसके लिए दवाई भी रहना चाहिए ?
बिहार राज्य के नालंदा ज़िला के नगरनौसा प्रखंड से 40 वर्षीय बेबी देवी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि डिप्रेशन और चिंता से बचने का क्या उपाय है ?क्या ज़्यादा सोना सेहत के लिए अच्छा रहता है या ख़राब रहता है ?
बिहार राज्य के नालंदा ज़िला के नगरनौसा प्रखंड से 18 वर्षीय पीहू कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि क्या ज़्यादा सोना सेहत के लिए अच्छा रहता है या ख़राब रहता है ?इसका कारण बताए ?इससे बचाव की जानकारी चाहिए।
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बिहार राज्य के नालंदा ज़िला के नगरनौसा प्रखंड से 30 वर्षीय अनीता देवी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि चिंता और डिप्रेशन में जाने से कैसे बचे ?क्या चिंता और डिप्रेशन के लिए दवाई लेना ज़रूरी है ?
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बिहार राज्य के नालंदा ज़िला के नगरनौसा प्रखंड से 20 वर्षीय मुन्नी देवी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि मानसिक स्वास्थ्य को कैसे पहचाने ?मानसिक स्वास्थ्य के क्या लक्षण है ?
बिहार राज्य के नालंदा ज़िला के नगरनौसा प्रखंड से 25 वर्षीय शोभावती देवी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि मानसिक स्वास्थ्य की बीमारी का पहचान कैसे करें ?
बिहार राज्य के नालंदा ज़िला के नगरनौसा प्रखंड से रेखा देवी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि चिंता से नींद नहीं आना बीमारी का लक्षण है क्या ?
बिहार राज्य के नालंदा ज़िला के नगरनौसा प्रखंड से 35 वर्षीय ज्ञानसु देवी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि क्या ज्यादा सोचने से डिप्रेशन का शिकार हो सकते हैं ? इससे निकलने का उपाय बतायें।
बिहार राज्य के नालंदा ज़िला के नगरनौसा प्रखंड से पिंकी कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि क्या मानसिक बीमारी का इलाज सिर्फ दवा से होता है ? या इसे ठीक करने के लिए और भी उपाय अपनाये जा सकते हैं ?
बिहार राज्य के नालंदा ज़िला के नगरनौसा प्रखंड से कोमल कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि मानसिक स्वास्थ्य को ले कर समाज में जागरूकता कैसे बढ़ाई जाए ?

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जिन लोगों को अवसाद होने का खतरा होता है, उनमें इसे कुछ हद तक रोका जा सकता है।इसके लिए कुछ बातें मदद कर सकती हैं जैसे शराब का सीमित सेवन करना और नशे के पदार्थों से दूर रहना।अगर किसी व्यक्ति को पहले एक या अधिक बार अवसाद के दौरे हो चुके हैं, तो डॉक्टर सलाह दे सकते हैं कि वे लंबे समय तक एंटीडिप्रेशन दवाएँ लेते रहें कभी-कभी ये दवाई कई महीनों या सालों तक लेना पड़ सकता है ।इससे अवसाद दोबारा लौटने की संभावना कम हो जाती है।इसके साथ-साथ मनोचिकित्सा या काउंसलिंग में भाग लेना भी बहुत उपयोगी होता है। इससे व्यक्ति खुद का ध्यान रखने के तरीके सीखता है और भविष्य में अवसाद दोबारा होने का खतरा घटता है।
Nov. 1, 2025, 11:24 a.m. | Tags: information health mentalhealth