नमस्कार श्रोता , मेरी बहू का एक नया कार्यक्रम है , सर पंचक नालंदा , मैं उनके पंडक का निवासी हूं , मैंने एलोक की कहानी सुनी है , जिसे बच्चे बजाते हैं , इसलिए मैं अपने बच्चों को बगीचे में ले जाता था और किसी को बगीचे में लाता था । तो इसमें कोयल की आवाज़ है जो मिठाई पर है और कौवे की आवाज़ है जो कठोर है , इसलिए इसमें हम जानते हैं कि कब्रें कोयल की तरह मीठी बोलती थीं और इसे यह कहा जाता है और रंग की बोली जो है । मेटा की कठोरता जो कि बोली है , बोलियों के प्रकार को दर्शाती है , ठीक है और इसी तरह अच्छा तरीका है कि कितना मीठा बोला जाता है , कितना कठिन बोला जाता है , मीठा बोला जाता है जो मीठा होता है जो चिकना होता है और कठोर बोला जाता है जो दूर होता है ।