आप हमें बातें की आज के समय में मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना क्यों जरुरी है?आज की कड़ी में बताई गई मानसिक आपके अनुसार मानसिक स्वास्थ्य के प्रति लोग कितने जागरूक है ?अगर आपके परिवार के सदस्यों या किसी जाननेवालों में आज की कड़ी में बताई गई मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कोई भी लक्षण दिखे है तो इसके लिए क्या करना चाहिए ?मानसिक स्वास्थ्य के प्रति लोग सजग और जागरूक हो पाएं इसके लिए सामुदायिक स्तर पर क्या किया जाना चाहिए ?
यौन उत्पीड़न हमारे समाज की एक बड़ी समस्या है और बहुत से लोग इसका शिकार भी हो जाते हैं . हम समझते है की केवल साबधानी बरतने से ही ऐसे परिस्थितिओं को हमेशा नहीं टाला जा सकता है बल्कि सामाजिक बदलाव से ही इस समस्या को जड़ से ख़तम किया जा सकता है। ऐसे में , आप को क्या लगता है की किस तरह का बदलाव हमारे समाज को एक सुरक्षित और बेहतर समाज बनने में मदद कर सकती है ? और क्या केवल कड़े कानून लागु करने से ही यौन उत्पीड़न के शिकार हुए लोगो को इन्साफ दिलवाया जा सकता है ? यौन उत्पीड़न के शिकार हुए लोगो के प्रति वर्तमान में दिखने वाले सामाजिक प्रतिक्रियों पे आप का क्या राय है ?
हर व्यक्ति को जीवन के किसी न किसी पड़ाव पर ऐसे पियर प्रेशर यानि की अपने साथियों के दबाद का सामना करना पड़ता है। ऐसे में आपके अनुसार या दबाव हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करता है ? कई बार दोस्तों के दबाव में आकर लोग ऐसे काम करने को आगे बढ़ जाते हैं जो पूरी तरीके से सही नहीं होता है लेकिन सब जानते समझते हुए भी अपने दोस्तों को ना नहीं कह पाते है। आखिर इसके पीछे क्या कारण होता है ? और क्या आपने कभी ऐसे दबाव का सामना किया है ?
हमारे आसपास ऐसे कौन कौन सी परिस्थिति देखने को मिलती है जो एक ब्यक्ति को अवसाद ग्रस्त कर सकती है और अगर आपके किसी अपने में आज के कड़ी में बताये गए लक्षणों में से कोई लक्षण देखने को मिले तो सबसे पहला कदम आप क्या उठाएंगे ? इस तनाव भरी ज़िन्दगी में बच्चो और युवाओं को मानसिक तौर पर मज़बूत बनाने और अवसाद की स्थिति से दूर रखने के लिए माता पिता व परिवार के दूसरे सदस्यों की क्या भूमिका है ?
बुलिंग का सामना करना कोई आसान काम नहीं होता हमारे समाज में कई ऐसे लोग हैं जो इसका शिकार है क्या आपने या आपके किसी जानने वाले ने कभी अपने जीवन में बुलिंग का सामना किया है ? आखिर क्या वजह है कि हमारे समाज में बुलिंग जैसी समस्या मौजूद है और लोग इस समस्या से जूझने के लिए मजबूर होते हैं ? अगर कोई व्यक्ति इस समस्या से जूझ रहा है तो ऐसी स्थिति में वह खुद को इससे बाहर निकालने के लिए क्या कर सकते हैं ? और बुलिंग जैसी समस्या को समाज से मिटाने के लिए सामुदायिक स्तर पर किस तरह की पहल की जा सकती ?
उत्तर प्रदेश राज्य गाजीपुर जनपद के रहने वाले सुजित सिंह इंटरनेशनल ह्युमन राष्ट्रीय एम्बेसडर से मानसिक स्वास्थ्य सहित किशोरावस्था में होने वाले खास बदलाव पर हुई विस्तृत चर्चा........
किशोरावस्था की उम्र
उत्तरप्रदेश राज्य के ग़ाज़ीपुर जिला से उपेंद्र कुमार की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से नारायण से हुई। नारायण यह बताना चाहते हैं कि किशोरावस्था की उम्र बारह से अठारह साल तक होती है।किशोरावस्था में मानसिक और शारीरिक बदलाव आते हैं।व्यक्ति जब बाल्य अवस्था से किशोरावस्था में आता है तो वह अपने परिवार को आगे बढ़ाने के बारे में सोचता है।बच्चे आज कल मोबाइल का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।माता पिता देखते हैं की अगर उनके बच्चे पढ़ना चाहते हैं तो किसी भी परिस्थिति वह अपने बच्चों को पढ़ाते हैं।अगर बच्चा गलत सांगत में पड़ गया है तो माता पिता को अपने प्रॉपर्टी या पैसा नहीं देना चाहिए क्योंकि वह उस पैसा का गलत इस्तेमाल कर सकता है।बच्चों के शादी होने तक माता पिता को अपने बच्चों पर दृष्टि बनाए रखना चाहिए।
आज के समय में लोगो आख़िरकार इतने ज़्यादा अकेलेपन का शिकार क्यों हो जाते है ? वे कौन से वजह होते हैं कि लोग साथ साथ होते हुए भी अपनी मन की बात एक दूसरे तक नहीं पहुचा पते है ? अपने परिवार और अपनों को इस अकेलेपन से दूर रखने के लिए आप अपने स्तर पर क्या करना चाहेंगे ?
हमारे समझ में आज भी यौन शोषण के बारे में एक अनचाही चुप्पी साध ली जाती है और पीड़ित व्यक्ति को ही कहीं न कहीं हर बात के लिए जिम्मेदर बना देने की प्रथा चली आ रही है। पर ऐसा क्यों है? साथ ही इस तरह के सामाजिक दबावों के अतिरिक्त और क्या वजह होती है जिसके लिए आज भी कई सारे यौन शोषण के केस पुलिस रिपोर्ट में दर्ज नहीं होते हैं ? समाज में फैले यौन शोषण के मानसिकता के लिए कौन और कैसे जिम्मेदार है ? और समाज से इस मानसिकता को हटाने के लिए तुरंत किन - किन बातों पर अमल करना जरुरी है ?