गाजीपुर। उत्तर प्रदेश सरकार के ‘‘नव निर्माण के नौ वर्ष’’ पूर्ण होने के अवसर पर ऑडिटोरियम सभागार में राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन एवं टीबी मुक्त पंचायत कार्यक्रम का भव्य शुभारम्भ विधान परिषद सदस्य विशाल सिंह चंचल एवं नगर पालिका अध्यक्ष सरिता अग्रवाल की उपस्थिति में मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

जिले में डेंगू के अब तक 49 मैरिज मिल चुके हैं

1652 मरीजों को मिला आरोग्य मेले का लाभ

स्वास्थ्य सेवरल में महिलाओं को मिली मुफ्त दवाई

नाम सुनीता कुमारी ,उम्र 28 वर्ष ,पिनकोड 275202

"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के अंतर्गत कृषि विशेषज्ञ श्री जिव दास साहू मटर के फसल में लगने वाली बीमारियां एवं उपचार से जुड़ी जानकारी दे रहे हैं। पूरी जानकारी विस्तार से सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें.

एड्स इस नाम से हम सभी भली भांति परिचित हैं इसका पूरा नाम है 'एक्वायर्ड इम्यूलनो डेफिसिएंशी सिंड्रोम ' यह एक तरह का वायरस है जिसे एचआईवी के नाम से भी जाना जाता है।यह एक जानलेवा बीमारी है लेकिन आज भी लोगों में एड्स को लेकर सतर्कता नहीं है।साथ ही इसे समाज में भेदभाव की भावना से देखा जाता है। एड्स के प्रति जागरूकता फ़ैलाने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है। दोस्तों , हम सभी को एड्स को लेकर सतर्क रहना है ,साथ ही लोगों में सर्तकता लाने की भी ज़रुरत है।साथियों, एड्स का उपचार भेदभाव नहीं बल्कि प्यार है। आइये हम सभी मिलकर विश्व एड्स दिवस मनाए और लोगों में एड्स के प्रति अलख जगाए। सतर्क रहें,सुरक्षित रहें

उत्तर प्रदेश राज्य के गाजीपुर जिला से उपेंद्र कुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि गाजीपुर से जनपद सहित अन्य क्षेत्रों में अब धीरे-धीरे भीषण गर्मी से लोगों को निजात मिल रही है और ठंड अपनी दस्तक धीरे-धीरे बनाना शुरू कर दी है यैसे में लोगों को बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही अपने आस-पास के लोगों में भी ऐसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। बदलते मौसम में अक्सर लोगों को सर्दी, वायरल बुखार आदि जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

यह कार्यक्रम बताता है कि कैसे अनियमित बारिश, सूखा और बाढ़ किसानों की आजीविका, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य और समग्र जीवन गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं। यह श्रोताओं को अपने अनुभव साझा करने और समाधान सुझाने के लिए आमंत्रित करता है, जिससे जागरूकता बढ़ाने और सामुदायिक समर्थन को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जाता है।

पानी में आर्सेनिक, लोह तत्व और दूसरे घातक पदार्थों की मात्रा महिलाओं के स्वास्थ्य पर सबसे बुरा असर कर रही है और फिर यही असर गर्भपात, समय से पहले बच्चे का जन्म या फिर कुपोषण के रूप में सामने आ रहा है. साथियों, हमें बताएं कि आपके परिवार में अगर कोई गर्भवति महिला या नवजात शिशु या फिर छोटे बच्चे हैं तो उन्हें पीने का पानी देने से पहले किस प्रकार साफ करते हैं? अगर डॉक्टर कहते हैं कि बच्चों और महिलाओं को पीने का साफ पानी दें, तो आप उसकी व्यवस्था कैसे कर रहे हैं? क्या आंगनबाडी केन्द्र, एएनएम और आशा कार्यकर्ता आपको साफ पानी का महत्व बताती हैं? और ये भी बताएं कि आप अपने घर में किस माध्यम से पानी लाते हैं यानि बोरवेल, चापाकल या कुएं और तालाबों से?