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"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ जीव दास साहू टमाटर की नर्सरी तैयार करने की विधि के बारे में जानकारी दे रहें हैं। अधिक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें.

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सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में...

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जी हाँ साथियों, शिक्षा का मानव जीवन में एक अलग महत्व है. शिक्षा ही एक मात्र ऐसा हथियार है जो न सिर्फ एक व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है बल्कि समाज को एक सही रास्ता भी दिखाता है। शिक्षा से समाज में फैले अंधकार को मिटाया जा सकता है। शिक्षा हर वर्ग के लोगों के लिए जरूरी है. हरेक वर्ग को शिक्षा के महत्व को समझाने के उद्देश्य से विश्व साक्षरता दिवस मनाया जाता है।दुनिया भर में साक्षरता दर को बढ़ावा देने के उदेश्य से और सभी को शिक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए यूनेस्को ने 7 नवंबर 1965 में इस दिन को मनाने का पहल किया। इसके बाद 8 सितंबर 1966 को पहली बार विश्व साक्षरता दिवस मनाया गया और तब से लेकर हर वर्ष 8 सितंबर को साक्षरता दिवस मनाया जाता है. तो साथियों, आइये हम सब मिलकर शिक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करने का प्रण लें और इस पहल में अपना योगदान दें। आप सभी श्रोताओं को समस्त मोबाइल वाणी परिवार की ओर से विश्व साक्षरता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

दिल्ली के संत नगर से राजेश कुमार पाठक मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है की एक महिला एक बार में चार कार्यों को संभालती है, जब उसे माहौल मिलता है, तो वह काम में कोई फर्क नहीं डालती है, इसलिए पुरुषों को अपना मन बदलना होगा। अगर कोई लड़की ऑफिस में काम कर रही है उसे अपना काम करने दे , न की अपना काम भी सौप दे। देश में कानून का पालन अगर सही तरीके से हो तो निश्चित ही महिलायें आगे आएँगी

दिल्ली के संत नगर से राजेश कुमार पाठक मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है की पहले के समय में ऐसा नहीं होता था , लोग महिलाओं के चरित्र पर ऊँगली नहीं उठाते थे। लेकिन आज के समय में महिलाओं के साथ अत्याचार हो रहा है। ऐसे में महिलाओं का आगे बढ़ पाना बहुत मुश्किल है

दिल्ली के संत नगर से राजेश कुमार पाठक मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है की , दल बदल पहले भी हुआ करती थी, पर लोग प्रधान मंत्री पर ऐसे आरोप नहीं लगाते थे। मैं पूरी तरह से असहमत हूं कि प्रधानमंत्री ने कोई धमकी भरी माफी मांगी है। इन दिनों लोगों के पास डिग्री होती है , लेकिन लोग नैतिक मूल्य खो रहे हैं।

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