बनारस की साड़ियां पूरे विश्व में एक अलग पहचान रखती है। शादी-विवाह या अनेक ऐसे आयोजनों में इस साड़ियों के पहनने का आज भी रिवाज चला चला आ रहा है। लेकिन समय के साथ इन बनारसी साड़ियों की कीमत ने आसमान छू लिया है, बात अगर इस काम में जुड़े कारीगरों की जाए तो समय के साथ साड़ियों की कीमत तो जरूर बड़ी लेकिन इस काम में जुड़े लोगों खास कर कहे तो कारीगरों की मजदूरी पहले से भी अब कम हो चुकी है। हथकरघा में बचपन से जुड़े हैं। साड़ी के कारीगर गोपाल पटेल ने बताया कि मैं बचपन से इस काम में जुड़ा हुआ हूं। लेकिन अब इस काम से मेरा मन उठ चुका है। कारण पूछने पर उन्होंने बताया कि एक साड़ी बनने में हम लोगों को एक से डेढ़ महीना लग जाता है। ऐसे में 10 घंटे प्रतिदिन काम किया जाता है। लेकिन अगर मजदूरी की बात आए तो 300 से 400 सौ रुपए तक ही हम लोग कमा पाते हैं। ऐसे में 8 घंटे काम करने वाले लेबरों से भी हमारी मजदूरी काम है। इसको देखते हुए अब इस काम को करने का मन नहीं करता उन्होंने कहा कि अगर हम साड़ियां बना भी लेते हैं। तो गद्दीदार हमारे साड़ियों की कीमत को देने में दो से तीन महीना तक लगा देते हैं। उन्होंने कहा कि मैं अपने बेटे को इस काम से दूर ही रखा क्योंकि इस काम में जो समस्या मैं झेल रहा हूं। मैं नहीं चाहता कि भविष्य में मेरा बेटा भी इसे दो-चार हो