महाकवि जयशंकर प्रसाद साहित्य संस्कृति महोत्सव में प्रसाद जी के पैतृक आवास में महाकाव्य कामायनी जीवंत हुई। नागरीप्रचारिणी सभा के अंतर्गत रूपवाणी के 15 कलाकारों ने 55 मिनट की नृत्यनाटिका में भावपूर्ण प्रस्तुति के नए प्रतिमान गढ़े। रंगकर्मी और निर्देशक व्योमेश शुक्ल ने बताया कि मूल कविता की पंक्तियों के आधार पर नाट्यालेख और पाश्वं संगीत तैयार किया गया था। संगीत पूरी तरह बनारस घराने के शास्त्री संगीत पर आधारित था प्रस्तुति में छऊ भरतनाट्यम और कथक का प्रयोग किया गया। नित्य नाटकों में 15 कलाकारों प्रलय से प्रारंभ कर मनु की चिंता श्रद्धा का आगमन नूतन निर्माण मानव का जन्म नए प्रदेश का निर्माण और अंत में श्रद्धा के साथ मनु का हिमालय प्रस्थान का मंच किया