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जिला दरभंगा,से सोनी कुमारी बिहार मोबाईल वाणी के माध्यम से कहती है की आग लगने के बाद ग्रामीणो को बहुत ज्यादा क्षति होती है लोगो को लगता है की सरकार मुवाबजे देगी लेकिन सरकारी मुआबजा इतना काम मिलता है की ग्रामीण अपनी जिंदगी की शुरुवात अच्छे से नहीं कर पाते और मुवाबजे के लिए सरकरी दफ्तरो के चक्क्र काटने पड़ते है तब जाकर थोड़ी बहुत रकम मिलती है और इसी कारण लोग तंगी का शिकार हो जाते है और उनकी स्थिति बहुत ही ख़राब हो जाती है क्यूँकि सरकारी मुआबजा इतना काम मिलता है जिससे ना तो ये घर बना सकते है और ना अपना रोजमर्रा का सामान खरीद सकते है ।
जिला दरभंगा,से सोनी कुमारी बिहार मोबाईल वाणी के माध्यम से कहती है की आग लगने पर गाँव के लोगो को बहुत परेशानी होती है क्यूँकि गाँवो में ना तो बिजली की सुविधा है ना मोबाईल नेटवर्क है और ना और कोई सुविधा है लोगो को तालाब,नदी ,चापाकल के पानी से आग बुझाना पड़ता है जिसके कारण आग बुझाने में काफी समस्य लगता है और तबतक सबकुछ भरी मात्रा में जल जाती है फायरब्रिगेड गाड़ी को भी आने में समस्य लग जाता है ऐसी जगह में ना तो कोई संचार का साधन है और ना फायरब्रिगेड से कोई सम्पर्क है जिस कारण लोग अपनी मदद समय पर नहीं कर पाते और लोग रोजगार के अभाव में गाँव छोड़ कर शहर चले जाते है और शिक्षित नहीं हो पाते जिस कारण लोगो को ऐसी समस्याओं से जूझना पड़ता है ।
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दरभंगा,से आनंद कुमार बिहार मोबाईल वाणी के माघ्यम से कहते है की गर्मी के मौसम में आग लगने की ज्यादा समस्या होती है और ग्रामीण इलाको के लोग इस समस्या से ज्यादा ही प्रभावित होते है आग बुझाने के लिए सरकार द्वारा फायरब्रिगेड गाड़ी उपलब्ध कराया जाता है और आग लगने से जो क्षति होती है उसके क्षति पूर्ति के लिए सरकार द्वारा 15 सौ से 3 हजार तक राशि प्रदान करती है लेकिन दरभंगा जिले में 22 प्रखण्ड है जिसमे 8 या 9 फायरब्रिगेड है और 101 पर फोन करने पर तुरंत पहुँचती है लेकिन समय से फायरब्रिगेड गाड़ी समय से नहीं पहुँचाने पर आग लगने की समस्या ज्यादा होती है ।
दरभंगा,से कैलाश कुमार बिहार मोबाईल वाणी के माध्यम से कहते है की अधिकतर आग लगने की संभावना गर्मी के मौसम में होती है और ज्यादातर ग्रामीण इलाके में होती है ।
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सोनी कुमारी दरभंगा से कहती है गाँव में आग लगने से बहुत क्षति होती है खास कर तब जब आग रात के समय लगी हो इस तरह एक-एक कर के सभी घर आग की चपेट में आ जाती है।
जिला दरभंगा,से सोनी कुमारी बिहार मोबाईल वाणी के माध्यम से कहती है की हमारे देश में बहुत सारे गाँव है जो विकसित नहीं हुए है और इन गाँवो में अभी भी LPG गैस की जगह चूल्हा का उपयोग किया जाता है और चूल्हे पर खाना बनाना महिलाओं को सुविधाजनक लगता है वे सोचती है की चूल्हा जलाने पर कोई नुकसान नहीं होगा और पैसे भी बच जायेंगे और गाँवो में अत्यधिक जंगल और पेड़-पौधे होने के कारण जलावन की लकड़ी आसानी से उपलब्ध हो जाती है लेकिन उन्हें नहीं पता की कभी-कभी लकड़ी जलाना कितना भारी पड़ सकता है गर्मी के मौसम में आग चूल्हा पर खाना बनाने लालटेन,दिया जलाने से लगता है जैसे की महिलायें खाना बनाकर आग को बुझा देती है लेकिन आग पूरी तरह से नहीं बुझता है उसके छोटे-छोटे कण रह ही जाते है और हवा के झोको से उड़कर किसी झोपडी के सम्पर्क में आते ही आसानी से आग लग जाती है में लग जाते है इसी तरह आँधी या तूफान आने से दिया या लालटेन पलट जाती है जिसके कारण घरो में आग लग जाती है इसलिए गाँव के लोगो को बहुत सावधानी से रहना चाहिए कहीं भी आग दिखने पर उसे बुझा देना चाहिए
