जल जीवन हरियाली से जिले में कुओं के जीर्णोद्धार पर करीब नौ करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं। लेकिन गर्मी की शुरूआती दौर में ही अधिकांश कुओं में पानी नहीं है। जिले में 2262 कुओं के जीर्णोद्धार का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके विरूद्ध 1390 कुओं का जीर्णोद्धार किया गया है। जबकि 389 कुओं का जीर्णोद्धार की प्रक्रिया चल रही है। प्रति कुआं के जीर्णोद्धार पर 62 हजार 700 रुपये खर्च करना है। यह राशि पंचायतों को दी गयी है। ग्रामीणों का कहना है कि कुओं का रंग रोगन तो कर दिया गया लेकिन इसकी उड़ाही नहीं की गयी,जिससे कुओं में पानी नहीं निकला। पानी नहीं निकलने से कुआं महज शो पीस बनकर रह गये हैं। हालांकि कुछ जगह कुओं का उपयोग हो रहा है। लेकिन इसका अधिक काम पेयजल के बदले दूसरे काम में लिया जाता है। जल जीवन हरियाली के तहत कुओं का जीर्णोद्धार होने से भूगर्भ जलस्तर में वृद्धि होती। लेकिन जब कुओं में पानी ही नहीं है तो जल जीवन हरियाली के उद्देश्यों से यह योजना भटकती नजर आ रही है। हालांकि जिला पंचायत राज विभाग के अनुसार सूखे कुओं की उड़ाही कराना अनिवार्य है। इसको लेकर निर्देश दिये जाएंगे।