मोतिहारी नरसिंह बाबा मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय रामचरितमानस यज्ञ व श्री राम कथा के पांचवें दिवस का आगाज बांदा चित्रकूट से पधारे संगीत मंडली के भगवत भजन से हुआ। तत्पश्चात कथावाचक डॉ. रामगोपाल तिवारी ने जनकपुर के पुष्पवाटिका प्रसंग से राम कथा का प्रारंभ करते हुए बताया कि गुरु विश्वामित्र की आज्ञा के बाद राम जी और लक्ष्मण जी जब पुष्प वाटिका का भ्रमण/अवलोकन कर रहे थे तो वहां राम जी ने सीता जी को और सीता जी ने राम जी को देखा। रामजी ने सीता जी को देखकर लक्ष्मण जी से कहा कि यही महाराज विदेह की कन्या है, जिसे देखकर मन में अनेक विचार आ रहे हैं । इस प्रसंग की तात्विक विवेचना करते हुए उन्होंने बताया कि राम ज्ञान है, लक्ष्मण जी वैराग हैं, और सीता जी माया हैं । मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने अपनी मर्यादा की रक्षा के लिए अपने मन पर के क्षोभ को बैराग के समक्ष प्रस्तुत कर दिया। उन्होंने बताया कि रामजी स्वयं ज्ञान स्वरूप हैं अथवा उन्होंने ताड़का रूपी क्रोध पर विजय प्राप्त कर लिया। कथावाचक ने शिव के धनुष का अर्थ प्रस्तुत करते हुए बताया कि अंत चतुष्टय में विराट पुरुष के चंद्रमा मन है, ब्रह्मा बुद्धि हैं, विष्णु चित्त हैं, तथा शिव अहंकार के प्रतीक होते हैं। इस प्रसंग को और विस्तार देते हुए उन्होंने विवेचना किया कि विशुद्ध भक्ति की प्राप्ति के लिए मन बुद्धि और चित्त की निर्मलता आवश्यक है, किंतु अहंकार का टूटना अनिवार्य है। रामकथा का संचालन प्रो.रामनिरंजन पांडेय ने किया। इस अवसर पर भोलानाथ सिंह, अवध किशोर द्विवेद्वी, कामेश्वर सिंह, संजय कुमार तिवारी, ठाकुर साह व अरुण प्रसाद सहित अनेक रामभक्त थे।