राज्य में जाति आधारित गणना के दूसरे चरण की शुरुआत 15 अप्रैल से होगी। सामान्य प्रशासन विभाग इससे संबंधित विधिवत अधिसूचना जल्द जारी करेगा। इस बार की गणना में सभी सूचीबद्ध जातियों की मौजूदा संख्या पता करने के अलावा किसी नई जाति के बारे में भी जानकारी एकत्र करना है। ताकि इस सर्वेक्षण कार्य के दौरान यह पता चल सके कि क्या राज्य में अब तक ऐसी कोई जाति मौजूद है, जो अब तक सरकारी सूची में शामिल होने से छूटी हुई है। कुछ एक बार चंपारण और सासाराम इलाकों से कुछ एक जातियों के नाम सामने आये थे, जिन्हें लेकर विवाद हुआ था और यह स्पष्ट नहीं हो पाया था कि ये कौन-सी श्रेणी में आती हैं। जाति आधारित इस गणना के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि किस जाति की मौजूदा संख्या कितनी है। साथ ही इनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का भी आंकलन सही तरीके से हो सकेगा। अगर गणना के दौरान किसी नई जाति का नाम सामने आता है, तो इसके बाद यह देखा जाएगा कि इसे किस श्रेणी में रखा जाए। इसमें यह भी सूक्ष्मता से अध्ययन किया जाएगा कि यह नई जाति वर्तमान में मौजूद किसी जाति की उप-जाति तो नहीं है। जाति का कोड या क्रम संख्या हिन्दी वर्णमाला के हिसाब से तय किया गया है। नई जाति का पता लगाने के लिए ही जाति गणना के फॉर्म में जातियों की पहले से सूचीबद्ध संख्या से एक संख्या अधिक यानी 215 को बतौर कोड के तौर पर कॉलम में लिखने का प्रावधान किया गया है। अगर कोई नई जाति सामने आती है, तो जाति वाले कॉलम के सामने प्रगणक 215 लिखकर उस जाति का नाम लिखेंगे। अगर कोई नई जाति नहीं है, तो जाति का नाम और सूची में जिस क्रम संख्या पर यह जाति मौजूद है, उसका क्रम के साथ नाम लिखा जाएगा। दूसरे चरण की गणना के कार्य को प्रभावी तरीके से करने के लिए सभी प्रगणकों को मोबाइल पर दी जाने वाली विशेष सॉफ्टवेयर में भी यह प्रावधान किया गया है। इसके जाति वाले कॉलम में जाति का नाम भरने पर उसके सामने जाति का क्रमांक संख्या कोड दर्ज हो जायेगा। जब सामान्य प्रशासन विभाग की तरफ से दूसरे चरण की गणना से संबंधित अधिसूचना जारी की जाएगी, तो इसके साथ ही सभी 214 जातियों की सूची भी समेकित तौर पर प्रकाशित करने की संभावना है। अगर कोई पशु पाले हुए हैं, तो इसकी जानकारी भी बतानी होगी।