सोलर पैनल, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई सुविधा के साथ जीरो टिलेज तकनीकी से कृषि विज्ञान केंद्र किसान हित में गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन कर रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र पिपराकोठी देश का सर्वोच्च कृषि विज्ञान केंद्र है। और उसी के अनुरूप बीज उत्पादन कार्य कर रहा है। फार्म पर गेहूं की उन्नत किस्म के बीज, मसूर, मक्का आदि के उन्नत प्रभेद विकसित किए गए हैं। उक्त बातें निदेशक बीज, पूसा के डॉ.डीके राय कृषि विज्ञान केंद्र में बीज उत्पादन फार्म के दौरे पर कहा। साथ में उनके निजी सहयोगी राजेश कुमार ने केंद्र के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ.अरविंद कुमार सिंह के साथ बीज उत्पादन फार्म का निरीक्षण किया। बताया कि नवंबर माह में ही समय से गेहूं की बुवाई हो गई थी। जिसको जीरो टिलेज तकनीकी के द्वारा धान के कटने के बाद लगाया गया था। जिसका परिणाम यह है कि फसल अब पकने की अवस्था में है। साथ ही साथ धान का बचा हुआ अवशेष मिट्टी में मिल करके खाद का रूप ले चुका है। जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति में सुधार हुआ है। फार्म पर लगे हुए सोलर पैनल से फसलों की सिंचाई होती है। जिससे हीट स्ट्रेस की समस्या से निजात मिला है। साथ ही साथ बिजली पर होने वाले खर्च में बचत हुआ है। कहा कि सोलर पैनल से कनेक्टेड तथा स्प्रिंकलर इरिगेशन सिस्टम का भी जाल बिछा हुआ है। जिससे फसलों पर सही समय पर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है। तथा पानी में भी 60 से 80 फीसद तक की बचत देखी गई है। केंद्र के वरीय वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि बीज उत्पादन का कार्य बड़े स्तर पर किया जा रहा है।जिसमें आनंद कुमार, फसल विशेषज्ञ तथा मनीष कुमार, फार्म मैनेजर का बहुत योगदान है। तथा वे कड़ी मेहनत के साथ गुणवत्तापूर्ण बीच का उत्पादन कर रहे हैं। साथ ही साथ आने वाले सीजन में फार्म पर मोटा अनाज और ढैचा का भी बीज उत्पादन किया जाएगा जिससे अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष के अंतर्गत मोटा अनाज को बढ़ावा मिलेगा। और किसानों के बीच में इसकी लोकप्रियता बढ़ेगी। निदेशक बीज ने वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ अरविंद कुमार सिंह को गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन करने के लिए बधाई दिया।और साथ ही साथ आने वाले सीजन में भी किसानों को क्वालिटी सीट उपलब्ध हो इसको सुनिश्चित करने के लिए कई सुझाव भी दिए। तथा मोटा अनाज के उत्पादन करने के लिए भी कहा जिससे किसानों के बीच में मोटा अनाज का प्रचार-प्रसार हो सके और आने वाली पीढ़ी स्वास्थ्य रहे।