रंगोत्सव होली के पर्व को लेकर नगर सहित जिले के सभी घरों में इसकी तैयारी आरंभ हो चुकी है । होलिकादहन हो या अन्य कोई त्योहार इसकी तैयारी कुछ दिन पहले से ही आरंभ हो जाती है। होली पर एक दिवसीय कार्यक्रम को लेकर सुदूर ग्रामीणक्षेत्रों में गाय के गोबर से बने उपलों की बहुत डिमांड रहती है।इसका कारण यह है कि गाय के गोबर को देवतुल्य माना जाता है । गाय के गोबर का उपला ही होलिकादहन में शामिल किया जाता है। पांच सौ रुपये प्रति ढेरी बिकता है उपलाजिले के गांवों में ग्रामीण अपने-अपने दरवाजे पर गाय-भैंस आदि पालते हैं। होलिकादहन के अलावा ग्रामीणों के प्रत्येक पर्व-त्योहार पर आग जलाने और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में उपलों का उपयोग किया जाता है। जिसके परिणामस्वरूप सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में उपले पांच सौ रुपये प्रति ढेरी से लेकर आठ सौ रुपये प्रति ढेरी तक बिक जाते हैं।
