मोटे अनाज जिले के किसानों को सबल बनाएंगे। जलवायु परिवर्तन के चलते होने वाले नुकसान की भरपाई करेंगे। यही कारण है कि चौथे कृषि रोड मैप में सरकार मोटे अनाज को प्रोत्साहित करने की तैयारी कर रही है। मोटे और पोषक अनाज का रकबा बढ़ाने के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा। कृषि विशेषज्ञों ने इस पर काम शुरू कर दिया है। यह देखा जा रहा है कि जिले की मिट्टी कौन सी फसल के लिए उपयुक्त है। कम पानी या सूखे की स्थिति में भी मोटे अनाज की फसल हो सकती है। इससे किसानों को नुकसान भी कम होता है। इसीलिए जलवायु परिवर्तन से धान-गेहूं की फसल को हो रहे नुकसान का सामना करने के लिए इसे अपनाया जा रहा है। अभी जलवायु अनुकूल खेती के तहत कई गांवों में मोटे अनाज की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। अब इसे अधिक क्षेत्रों में ले जाने और अधिक किसानों को जोड़ने की योजना है। इसी के तहत चौथे कृषि रोड मैप में मोटे अनाज को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा। किसानों को ऐसे अनाज की खेती के तौर-तरीके भी बताए जाएंगे। मडुआ, ज्वार-बाजारा, सावां, कौनी, चीना आदि का रकबा बढ़ाने का प्रयास है। जलवायु परिवर्तन का सामना करने की क्षमता और पोषक तत्वों की अधिकता के चलते ही पूरे विश्व में मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। यही कारण है कि वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष (इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स) घोषित किया गया है। इसके तहत भी मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा दिया जाना है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2018 को मोटा अनाज वर्ष के रूप में मनाया था।
