जिला मधुबनी,से सरोज कुमार बिहार मोबाईल वाणी के माध्यम से कहते है की इनके यहाँ प्राथमिक और माध्यमिक किसी भी विद्यालय में परीक्षा नहीं लिया गया और बिना परीक्षा के दिया जा रहा है विद्यार्थियो को विद्यालय परित्याग पत्र।आमिर घर के लोग तो प्राइवेट से पढ़ लेते है लेकिन गरीब घर के लोग सिर्फ सरकारी स्कूलो में ही पढ़ पते है और अगर ऐसा होगा तो फिर इन विद्यार्थियो के जीवन के साथ खिलवाड़ होगा।अगर शिक्षा का यही स्थिति रही तो सरकार कुछ भी कर ले आर्थिक विकास नहीं हो पायेगा।
