बिहार राज्य के जिला जमुई के गिद्धौर प्रखंड से से संजीवन कुमार जी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि बाल विवाह करना महंगा सौदा साबित होगा। कानून का अनुपालन सख्ती से करने की प्रशासनिक कवायद तेज कर दी गई है। राज्य सरकार ने एक और सख्त कदम उठाते हुए शादी कार्ड छपवाने के लिए प्रिंटिंग प्रेस वालों को वर-वधू का जन्म प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य किया गया है। शादी का कार्ड छपने से लेकर विवाह भवन, बैंड बाजे, कैटरिंग की बुकिंग तक के लिए जन्म प्रमाण पत्र देना होगा।इतना ही नहीं मंदिरों में होने वाली शादियोंं में भी दोनों पक्षों को उम्र से संबंधित प्रमाणपत्र को अनिवार्य किया गया है। नियम को कारगर बनाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर जांच अभियान चलाया जाएगा। उल्लंघन का मामला सामने आने पर सेवा देने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार के समाज कल्याण विभाग द्वारा भेजे गए पत्र के अनुसार इस नियमावली का अनुपालन सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। दरअसल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मंशा समाज में वर्षों से जारी दहेज प्रथा व बाल विवाह को जड़ से समाप्त करने की है। इसके तहत जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन जबतक नियमों को सख्त नहीं किया जाता रोक संभव नहीं है। विभाग ने नियमावली के साथ कुछ तर्क भी दिए हैं। दरअसल राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य संगठन द्वारा किए गए सर्वेक्षण के बाद जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार 26 प्रतिशत से अधिक बालिकाओं की शादी 18 वर्ष से कम उम्र में कर दी जाती है। बाल विवाह प्रथा को रोकने के लिए हर स्तर पर तैयारी आवश्यक है।लिहाजा होटलों, शादी कार्ड सहित अन्य सेवा प्रदाताओं को अपनी सेवा देने से पहले यह जानना आवश्यक है कि वर-वधू की शादी सही उम्र पर हो रही है। इसके लिए जन्म प्रमाण पत्र को अनिवार्य किया गया है।