बिहार से रफ़ीक जी बाल मजदूरी पर एक 16 वर्षीय बाल मजदूर दीपक जी से बातचीत की है। मोबाइल वाणी के साथ बातचीत में दीपक जी ने बताया कि उनके पिता के देहांत हो जाने के कारण उनके कंधे पर परिवार का रोजी-रोटी जुटाने का भार आ पड़ा।ऐसे में दीपक जी के समक्ष एक मात्र रास्ता था मजदूरी करना।दीपक जी ने बताया कि जब वे फ़ैक्ट्री में काम के तलाश में पहुंचे तो उन्हें फ़ैक्ट्री मालिक द्वारा काम देने से इनकार कर दिया गया, लेकिन फिर उन्हें काम में रखा गया। वे कहते हैं कि सरकार द्वारा बनाई गई कानून से उन्हें कोई लाभ नहीं मिला और न ही इस फ़ैक्टरी में उनका और उनके जैसा कार्यरत अन्य बाल मजदूरों का कोई भविष्य है। वे काम मज़बूरी में करते हैं और शायद इसलिए उन्हें फ़ैक्ट्री में ये काम छुपकर करना पड़ता है यहां कि उन्हें फ़ैक्ट्री से बाहर तक नहीं जाने दिया जाता। ऐसे में अब ये कहना तो मुश्किल है कि इसमें आखिर गलती किसकी है।फिर भी गलती चाहे जिस किसी का भी हो पर कंपनी भी सारे नियम कानून को ताक पर रख कर इन मासूम बच्चों से काम करा रही है। लेकिन गौर करने वाली बात है कि इन सब के पीछे कहीं न कहीं प्रशासन जिम्मेदार जरूर है।
