आज सोमवार को जमुई जिले के महेश्वरी में आयोजित होने वाले लक्ष्मीनारायण महोत्सव की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मंदिर परिषद पूरी तरह सज धज कर तैयार हो गया। यहां आज श्रद्धालुओं का विशाल सैलाब उमडे़गा। इस संबंध में पूजा समिति के सदस्यों ने बताया कि महोत्सव का विधिवत प्रारंभ चतुर्दशी से ही हो जाता है। बता दे कि यहां कार्तिक पूर्णिमा के अवसर भगवान लक्ष्मीनारायण के दरवार में श्रद्धालु भक्तों की जनसैलाब उमड़ जाती है। अहोरात्रि महोत्सव को लेकर ग्रामीण काफी उत्साहित है।सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित है। पंचायत के मुखिया अवधेश सिंह, पूजा कमेटी के सदस्य व मंदिर के पुजारी महेश पांडेय, पितांबर पांडेय, राजेश पांडेय, राजीव सिंह, आनंद सिंह, पंकज सिंह, अभय सिंह, सुमेश सिंह, साहेब सिंह, मृत्युंजय सिंह, कैलाश सिंह, अजय सिंह, शिवानंद सिंह, बलबंत सिंह, रोहित सिंह, चुन्नू कुमार सिंह, अमरेश सिंह, पांडव सिंह आदि कहते हैं कि अहोरात्रि महोत्सव का इतिहास काफी पुराना है। प्रत्येक वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर भगवान लक्ष्मीनारायण का विशेष पूजा अर्चना करने की परंपरा वर्षों से निर्वाध रूप से चला आ रहा है। इसे अहोरात्रि महोत्सव के नाम से भी जाना जाता है। अहोरात्रि महोत्सव के अवसर पर बिहार के अलावे झारखंड प्रदेश से भी श्रद्धालु भक्त भगवान लक्ष्मीनारायण के दरवार में मत्था टेकने महेश्वरी गांव पहुंचते हैं, जिसमे राजनेता से लेकर बड़े-बड़े ब्यूरोक्रेट्स तक शामिल होतें हैं। इस महोत्सव का सबसे बड़ा खासियत यह है कि भगवान के प्रसाद के रूप में जो नैवेद्य चढ़ाया जाता है उसकी आपूर्ति गांव वाले ही करते हैं। भगवान पर अरवा चावल ,गुड़ व दही से पका विशेष पकवान जिसे दहियोरी कहा जाता है। वही नैवेद्य के रूप चढ़ाया जाता है। नैवेद्य तैयार करने के लिए लोग पूरी विधि विधान से चावल का आटा तैयार कर रहें हैं। अहोरात्रि के अवसर पर पूरे गांव में चूल्हा नहीं जलता है। इस अवसर पर यहां पहुंचने बाले मेहमान को भी पका पकाया भोजन ही परोसा जाता है।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।