बिहार के सीतामढ़ी ज़िला से दीपक ,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से 'मेरा मुखिया कैसा हो ' के तहत बताते है कि उनकी कुछ ग्रामीणों से बातचीत के दौरान यह मालूम हुआ कि हर एक गाँव से 7 से 8 प्रत्याशी खड़े हो रहे है जिनमें युवकों की संख्या ज़्यादा है। युवकों से बातचीत में उन्होंने जाना कि प्रखंड से विकास हेतु निधि आते है परन्तु मुखिया द्वारा इसका सही से इस्तेमाल नहीं किया जाता है। काफ़ी ऐसे भी गाँव है जो मुखिया के गैर ज़िम्मेदारी के कारण पिछड़ा हुआ है। इसलिए युवाओं की सोच है कि वो इन मुद्दों को ध्यान में रखते हुए राज्य का विकास कार्य में भागीदारी होंगे।वहीं जनता का कहना है कि हर बार मुखिया कुछ न कुछ उम्मीद जगाते है परन्तु पद मिलने के बाद उनका कोई कार्य नहीं दिखता न ही गाँव में कुछ बदलाव नज़र आता है। इसलिए इस चुनाव में उनके द्वारा नए लोगों को मौका देने का प्रयास है।
