दिल्ली, एनसीआर, बहादुरगढ़, हरियाणा से मनोहर लाल कश्यप साझा मंच मोबाइल वाली के माध्यम से बता रहे हैं कि संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार मामलों की समिति यूएनएससीआर ने भारत को लताड़ते हुए कहा कि नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ आंदोलन करने वाले ग्यारह आंदोलनकारियों को जल्द से जल्द जेल से रिहा करें। विशेषज्ञों ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनके अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। विशेष र्रोप से संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति ने गर्भवती महिला सुफ़रा जरगर की बात कही, जिसे एकांत कारावास में रखा गया, जिस स्वास्थ्य सुविधा भी नहीं दी गई और कहा कि भारत के लोकतंत्र का हनन हो रहा है। लोगों को अपना विचार रखने का अधिकार है। सरकार की ग़लत नीतियों का विरोध करना भी जनता का अधिकार है। जबकि भारत के अधिकारियों ने इस विषय में भेदभाव करते हुए नफरत और हिंसा फैलाने वालों की कोई जांच पड़ताल नहीं की। हाईकोर्ट के आदेश पर भी कोई कार्यवाही नहीं की गई, जिसमें मुख्य रुप से हिंसा करने वाले दो नाम दिलीप पांडे और अनुराग ठाकुर सामने आए। उन्होंने साफ-साफ कहा कि देश के गद्दारों को गोली मारो के नारे लगाने वालों को छोड़ दिया गया, क्योंकि ये मोदी सरकार के नेता हैं।
