बोकारो,चास से रमेश कुमार माइती झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से बाल यौन शोषण पर कहते है कि यह सभ्य समाज के लिए एक बदनुमा दाग है और हमारे रूढ़िवादी समाज में कई तरह कि भ्रांतिया फैली है कि बाल यौन शोषण केवल सुन्दर बच्चो के साथ होता है या फिर सिर्फ लड़की के साथ होता है या सगे सम्बन्धी यौन हिंसा नहीं करते है समाज में फैली भ्रांतिया और पश्चमी सभ्यता के कारण भी यौन हिंसा को बढ़ावा मिल जाता है जब हम पश्चमी सभ्यता को देखते है तो अपनी संस्कृति को भूल जाते है तभी इस प्रकार के बलात्कार और बाल यौन हिंसा जैसे काम होते।अत:हमें पश्चिमी सभ्यता के अच्छे गुणो को अपनाना है न कि बुरे कृत्यो को साथ ही हमें अपने समाज में बुरे कृत्यो को करने वालो को रोकना है और समाज से बहार निकल फेकना है क्योँकि इस तरह के कृत्य समाज को खोखला बना रहे है जो आने वाली पीढ़ी के लिए अच्छा नहीं है क्योकि बच्चो के मन पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है.