झारखण्ड राज्य के सिमडेगा ज़िला से सुप्रिया मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में किसानों के लिए सही फसल का चुनाव बहुत जरूरी हो गया है। मौसम का पैटर्न अनिश्चित है जैसे कभी सूखा, कभी बाढ़। ऐसे में किसानों को ऐसी फसलें अपनानी चाहिए जो कम पानी, गर्मी या नमी जैसी परिस्थितियों में भी अच्छी उपज दें सके । उन्हें सूखा और ताप-सहिष्णु फसलें जैसे ज्वार, बाजरा या चना अपनानी चाहिए। वर्षा जल संचयन से पानी को संरक्षित रखा जा सकता है ताकि जरूरत पड़ने पर सिंचाई की जा सके।मिश्रित खेती अपनाने से एक फसल खराब होने पर दूसरी फसल से नुकसान की भरपाई संभव होती है।किसानों को फसल बीमा योजनाओं से भी जुड़े रहना चाहिए ताकि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
