बोकारो,चास से रमेश कुमार मैती मोबाइल वाणी के माध्यम ये कहना चाहते है कि अभी कुछ दिन पहले महिला दिवस मनाया गया। इस अवसर पर बहोत प्रकार के कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मगर इतना सब होने के बाद भी आज हमलोग ये नही समझ रहे है कि इस पुरुष प्रधान देश में महिला को भी सम्मान से जीने का अधिकार है। ऐसा करने से वो आत्म निर्भर होगी,इस समाज में सम्मान के साथ जिए गी और बिना डरे इस समाज में अपना जीवन खुशाल बना पायेगी। सिर्फ कानून बनाने से कुछ नही होता है उसका पालन करना भी उतना ही जरुरी है। साथ ही साथ सरकार को महिलाओ के लिए रोजगार,शिक्षा का वयवस्था करना चाहए जिससे वो खुद को पुरुष के बराबर समझे और उनके साथ कंधे से कन्धा मिला कर चले। यह बात कहने और सुनने में बहोत अच्छा लगता है मगर वास्तविकता ये है कि आज भी महिलाए पुरुष से बहोत पीछे है। सरकार आज लडकियों को तो शिक्षा और रोजगार नही है दे रही है बिडम्बना ये है कि आज पुरुष के पास भी रोजगार नही है। यही कारन है कि पुरुष जब बेरोजगार हो जाते है तो अपना आक्रोश अपने परिजन और पत्नी पर निकलते है और उनसे इस तरह गरेलू हिंसा जैसे अपराध हो जो जाते है। अतः वो सर्कार से अनुरोध करते है कि लड़का और लड़की दोनों को ही रोजगार मुहैया कराए। रोजगार मिलने पर न तो घरेलु हिंसा जैसे अपराध होगा और साथ ही साथी महिला और पुरुष दोनों ही अपना जीवन ख़ुशी पूर्वक जी सकेंगे।
