सुनील सोरेन,धनबाद से झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से सरकार को कहना चाह रहे है की जिस भाषा की अपनी लिपि है उस भाषा से ही परीक्षा देनी चाहए परन्तु परीक्षा सिर्फ देवनागरी लिपि में ही देने की अनुमति है,इस प्रकार सरकार से आग्रह करते है की जिस भाषा की मान्यता प्राप्त है उसे वही भाषा में परीक्षा देने का अनुमति दी जाए।