जहाँ हमारा बचपन पला हमारी नन्ही-नन्ही कदमो से हमारा घर आँगन चमकता रहा। उन्ही आसियाने को हमसे छीन लिया जा रहा है।छोटे-छोटे टुकड़े में बटी हमारी भूमि को अधिग्रहण संशोधन कानून के नाम पर लूट लिया जा रहा है...? सरकार इस कानून को लागु करने से पूर्व कोई सोच विचार तो की होगी ना और जब सोची होगी तो जरूर उसे जनता के समक्ष में लाइ होगी। तो क्या इसके बारे में आपके पास कोई जानकारी है...? भूमि अधिग्रहण संशोधन कानून लागु होने से हमारा क्षेत्र तो मानो एक वीरान सा हो गया है। जहाँ तरह-तरह के बड़े बड़े छाएदार और फलदार पेड़ हुआ करते थे आज उसी जगह इस कानून के आने से बड़ी-बड़ी इमारते,कम्पनियाँ,कारखाने इत्यादि बनने लगी है। जिसका सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ने लगा है। पहले हमारे बुजुर्ग 80-90 साल तक जीवित रहा करते थें। वही आज हमारे परिवार वाले महज 50-60 वर्ष तक ही जीवित रहते हैं। जानते हैं इसका कारण को है जी हाँ सिर्फ और सिर्फ इन बड़ी-बड़ी कारखानों से निकलने वाले जहरीली गैस,धुआँ और कारखानों से निकलने वाले तेज ध्वनि जो लोगों को कई तरह के बिमारियों से ग्रसित कर रहा है...? क्या आपके क्षेत्र में भी लोग किसी तरह की बीमारी से ग्रसित हुए हैं...? पहले हमे अपनी भूमि से तजि-तजि और पौष्टिक वाली सब्जियाँ आसानी से मिल जाय करती थी जो हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी हुआ करता था। पर आज हमारी मिटटी,पानी और पर्यावरण में जहरीली पदार्थ मिलती जा रही है। तो क्या आपके क्षेत्र में इसे रोकने के लिए सरकार की ओर से कोई पहल किया जा रहा है....? सरकार देश को प्रगति की दिशा में ले जाने के लिए आम लोगों व किसानों की जमींन ले रही हैं ताकि बेरोजगार लोगों को रोजगार अपने क्षेत्र में ही मिल सकें पर फिर भी लोगों को रोजगार के लिए अपने गांव को छोड़ कर पलायन करना पड़ रहा है तो फिर ऐसे में अपनी जमीन की क़ुर्बानी देने वाले उन आम जनता व किसानों के हाथों में क्या आया...? .हाल के वर्षों में हुए भूमि अधिग्रहण में प्रावधान की काफ़ी आलोचना हुई है. इसके तहत सरकार ये यह कहकर किसानों की ज़मीने बिना सुनवाई ले लेती हैं कि परियोजना तत्काल शुरू करना ज़रूरी है.अधिग्रहण के कारण जीविका खोने वालों को 12 महीने के लिए प्रति परिवार तीन हज़ार रुपए प्रति माह जीवन निर्वाह भत्ता दिए जाने का प्रावधान है.इसके अलावा पचास हज़ार का पुनर्स्थापना भत्ता, ग्रामीण क्षेत्र में 150 वर्ग मीटर और शहरी क्षेत्रों में 50 वर्गमीटर ज़मीन पर बना बनाया मकान भी दिया जाने का प्रावधान है.भारत में भूमि आधी से ज़्यादा आबादी के लिए रोज़ी रोटी का प्रमुख साधन है. तो क्या सरकार अपनी दी हुई इन बड़े-बड़े वादों पर खरा उतने नजर आई है....? देश की आबादी बढ़ने के साथ साथ रहने के लिए धरती की जरुरत और भी तेजी से बढ़ती जा रही है ऐसे मे एक आम आदमी की ज़िंदेगी कैसे प्रभावित होती है...? जब उसी के सामने उसकी भूमि खंडित होती जा रही हो.. क्या आपके साथ भी भूमि अधिग्रहण कानून के नाम पर आपसे आपकी जमीन छीनी गई है...? इसे रोकने के लिए क्या आपने कोई भी प्रयास किया हैं...? या आपके क्षेत्र में किसी के साथ ऐसी घटना घटी है...?
