भारत में भ्रष्टाचार चर्चा और आन्दोलनों का एक प्रमुख विषय रहा है। आजादी के एक दशक बाद से ही भारत भ्रष्टाचार के दलदल में धंसा नजर आने लगा और आज यह स्थिति और भयावह हो चुकी है।भ्रष्टाचार से देश की अर्थव्यवस्था और प्रत्येक व्यक्ति पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।श्रोताओं,भारत में भ्रष्टाचार चर्चा और आन्दोलनों का एक प्रमुख विषय रहा है। आजादी के एक दशक बाद से ही भारत भ्रष्टाचार के दलदल में धंसा नजर आने लगा और आज यह स्थिति और भयावह हो चुकी है।भ्रष्टाचार से देश की अर्थव्यवस्था और प्रत्येक व्यक्ति पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।झारखण्ड के सरकारी कार्यालयों की स्थिति भी कुछ इसी तरह है। वर्तमान समय में यह गरीबो के लिए चिंता का विषय बन गया है। पुरे झारखण्ड में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है और सरकार विकास का ढिंढोरा पीट रही है।यहाँ तक की राज्य के मुख्यमंत्री भी मानते है की बिना रिश्वत के आजकल काम नहीं हो पा रहा है। श्रोताओं सरकारी दफ्तरों में काम करते हुए लोग भी तो हमारे जैसे ही किसी के परिवार से है लेकिन वो दफ्तर में जाते ही भ्रष्टाचारी क्यों और कैसे बन जाते है? क्या सिर्फ इंसानी लालच इसके लिए जिम्मेदार है या कोई और वजह भी है।सजा का डर भ्रष्ट अधिकारीयों को आखिर क्यों नही होती है ? क्या सरकार के पास भ्रष्टाचार को रोकने का कोई उपाय नही है ?
